📌 मुख्य बातें
- पंजाब जल मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने ₹214 करोड़ की कठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्घाटन किया — कांडी बेल्ट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहली बार नहरी पानी पहुंचा।
- परियोजना 33 गांवों की 11,500 एकड़ जमीन को सिंचाई देगी, साथ ही 650 kW सोलर प्लांट से बिजली की लागत घटेगी।
- मान सरकार में नहरी पानी का उपयोग 22% से बढ़कर 78% हुआ, सिंचाई ढांचे पर अब तक ₹6,700 करोड़ खर्च।
चंडीगढ़ / कठगढ़ (एसबीएस नगर) | 19 मार्च 2026: पंजाब की लंबे समय से उपेक्षित कांडी बेल्ट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, पंजाब जल संसाधन एवं मृदा तथा जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को ₹214 करोड़ की लागत से विकसित कठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्घाटन किया। पहली बार नहरी पानी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया है — जिससे कांडी क्षेत्र की सूखी और वर्षा आधारित जमीन सिंचित कृषि भूमि में बदल रही है।
33 गांवों की 11,500 एकड़ जमीन को मिलेगा फायदा
यह परियोजना 33 गांवों की लगभग 11,500 एकड़ कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में सुधार होगा। पहले से असिंचित इस इलाके में बेहतर फसलें उगाने की संभावना से जमीन की कीमतें भी बढ़ने की उम्मीद है।

यह योजना तीन चरणों में क्रियान्वित की जा रही है। पहला चरण — 13 गांवों में 4,000 एकड़ — फरवरी 2026 में ₹67 करोड़ की लागत से पूरा हो चुका है। दूसरा चरण, जिसकी लागत ₹107 करोड़ है, 14 गांवों में 5,500 एकड़ को कवर करेगा और सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। तीसरा चरण ₹40 करोड़ की लागत से 6 गांवों में 2,000 एकड़ तक सिंचाई पहुंचाएगा। बिजली की लागत कम करने के लिए 650 kW का सोलर प्लांट भी लगाया गया है।
“कठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना उन क्षेत्रों तक सिंचाई पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी जो ऊंचाई की चुनौतियों के कारण अब तक वंचित थे। यह परियोजना भूजल पर निर्भरता को काफी कम करेगी और क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ देगी।”
— बरिंदर कुमार गोयल, पंजाब जल संसाधन मंत्री
IIT-प्रशिक्षित टीम, उन्नत तकनीक और मिशन मोड में निष्पादन
यह योजना बिस्त दोआब नहर से जोड़ी गई है जिसकी डिस्चार्ज क्षमता 67 क्यूसेक है। पानी को पंपों के जरिए उठाकर एक विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से ऊंचे, निचले और अर्ध-पहाड़ी खेतों तक पहुंचाया जाएगा। पंप हाउस के लिए विभागीय जमीन का उपयोग किया गया, इसलिए कोई भूमि अधिग्रहण नहीं करना पड़ा।
परियोजना की डिजाइन के लिए उन्नत सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे किए गए तथा तकनीकी स्टाफ को IIT रुड़की और IIT रोपड़ में प्रशिक्षित किया गया। पूरी योजना मिशन मोड में मात्र छह महीनों में क्रियान्वित की गई। खेतों तक पानी कुशलता से पहुंचाने के लिए लगभग 94,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है।
इस परियोजना से पहले बालाचौर विधानसभा क्षेत्र के 72 गांवों में 28,205 एकड़ में सिंचाई उपलब्ध थी। इस योजना के पूरा होने के बाद सिंचाई कवरेज बढ़कर 105 गांवों में 39,705 एकड़ हो जाएगी।
मंत्री गोयल ने बताया कि CM भगवंत सिंह मान सरकार ने सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए अब तक ₹6,700 करोड़ खर्च किए हैं। सिंचाई के लिए नहरी पानी का उपयोग 22% से बढ़कर 78% हो गया है, जिससे भूजल स्तर में सुधार, बिजली की खपत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि हुई है।
