नई दिल्लीः कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रवासियों पर लगाई जा रही नई सीमा के पीछे की वजह स्पष्ट की। एक 7 मिनट के यूट्यूब वीडियो में उन्होंने स्वीकारा कि कनाडा की आव्रजन नीति में कई खामियां रही हैं, जिससे कुछ ‘गलत’ लोगों ने इसका गलत इस्तेमाल किया। ट्रूडो ने कहा, “कुछ लोग प्रवासियों को नौकरियों, डिग्रियों और नागरिकता के झूठे वादे करके उनका शोषण करते हैं।”
ट्रूडो की नई नीति के अनुसार, अगले 3 सालों में कनाडा में स्थायी और अस्थायी निवासियों की संख्या में काफी कमी की जाएगी। आने वाले चुनावों से पहले कनाडा में ट्रूडो सरकार की इस नीति को लेकर तीव्र चर्चा है और वह चुनावी सर्वे में कंजर्वेटिव पार्टी से पीछे चल रही है। ट्रूडो ने बताया कि कनाडा के आव्रजन प्रणाली को फर्जी कॉलेजों और बड़ी कंपनियों की ओर से शोषण का शिकार बनाया गया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद कामगारों की मांग बढ़ी, जिसका फायदा उठाने के लिए कुछ कंपनियों और संस्थानों ने प्रवासियों से ज्यादा फीस लेकर उन्हें दाखिले दिए। कनाडाई पीएम ने कहा, “बहुत से कॉलेज और यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों का शोषण कर रही थीं।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि कनाडा की आव्रजन प्रणाली मांग पर आधारित है और अस्थायी विदेशी कामगार अब कार्यबल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा, “कनाडा के उद्योग और सेक्टर नए श्रमिकों का स्वागत तो करना चाहते हैं, लेकिन हमारे यहां का आवास, स्वास्थ्य सेवा और अन्य बुनियादी ढांचा अभी उनके स्तर तक नहीं पहुंचा है।” नई नीति से कनाडा की अर्थव्यवस्था और समुदायों को व्यवस्थित करने का समय मिलेगा। ट्रूडो ने बताया कि इस नीति के चलते प्रमुख शहरों जैसे टोरंटो और वैंकूवर में किरायों में कमी आने लगी है।
साल 2025-2027 के लिए तय नई योजना में स्थायी निवासियों की संख्या में 21 प्रतिशत की कमी की जाएगी। 2025 में यह संख्या 5 लाख से घटाकर 3,95,000 कर दी जाएगी। वहीं अस्थायी निवासियों में भी भारी गिरावट की जाएगी। 2026 तक अस्थायी कामगारों की संख्या में 40 प्रतिशत की कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में भी 10 प्रतिशत की कटौती होगी।