जालंधर : अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज रविवार को जालंधर के सैंटर टाउन स्थित गुरुद्वारा दीवान स्थान साहिब पहुंचे। इस दौरान विभिन्न सिख संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। जत्थेदार गढ़गज ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब से पंथ को अलग नहीं किया जा सकता और न ही पंथ को गुरु ग्रंथ साहिब से तोड़ा जा सकता है।
कई बार सिखों को डराने और धर्म से दूर करने के प्रयास किए हैं। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जकरिया खान के समय केश रखने पर पाबंदी लगाई गई थी और उस दौर में सिख होना ही बागी माना जाता था।
