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जालंधरः इस किसान के बच्चे करते है Cambridge International School में पढ़ाई, देखें वीडियो

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जालंधर, ENS:  भोगपुर ब्लॉक के एक छोटे से गांव रानी भट्टी में स्थित किसान नेता मुकेश चंद्र के बेटे जालंधर के सबसे प्रसिद्ध स्कूल कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई करते हैं। वह सुबह इस प्रसिद्ध स्कूल में पढ़ाई करते है और शाम को खेतों में ट्रैक्टर चलाते है। पेशे से किसानों के ये बच्चे वैसे तो बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन खेती पर उनका विशेष ध्यान रहता है। स्कूल से आकर खेतों में पानी डालना उनका शौंक ही नहीं बल्कि जुनून बन गया है। ये बच्चे न केवल खेतों में ट्रैक्टर चलाते हैं, बल्कि जानवरों के लिए पट्ठे काटकर उन्हें देना और अन्य कृषि के कार्य करते हैं। दोनों बच्चों युवनेश और युवराज का कहना है कि उनके पिता उन्हें शहर के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे हैं।

लेकिन वे चाहते हैं कि वह पढ़ाई करके आगे बढ़कर अपने कृषि क्षेत्रों का विस्तार करें। अपने स्कूल के बारे में उनका कहना है कि उनके स्कूल में शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन और अफसरों के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन किसान होने के कारण उनके साथ कभी किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं हुआ। बल्कि उसके सभी दोस्त मिलकर उनके साथ पढ़ाई करते है। इतना ही नहीं, उन सभी को उनसे विशेष प्रेम है। वहीं पंजाब के युवाओं में विदेश के क्रेज को लेकर उनका कहना है कि वह नहीं चाहते कि वह पंजाब के उन लाखों युवाओं की तरह विदेश जाकर काम करें।

बच्चों का कहना है कि अगर इसी तरह पंजाब से युवा विदेश जाते रहे तो एक दिन पंजाब खाली हो जाएगा। उनके मुताबिक उनके परिवार का कोई भी बच्चा विदेश जाना नहीं चाहता। उनके मुताबिक, खेती उनके परिवार का व्यवसाय है और वह इस व्यवसाय को छोड़ना नहीं चाहते हैं। वे हाई स्कूल में पढ़ाई करने के बाद आगे कृषि की पढ़ाई करना चाहते हैं ताकि वे अपने खेत को बढ़ा सकें।उनके मुताबिक, वे देखते हैं कि किसानों के प्रति सरकार के रवैये के कारण आज उनके पिता अपने अन्य साथियों के साथ धरना-प्रदर्शन करने जाते हैं। वे चाहते हैं कि सरकार किसानों का समर्थन करें ताकि खेती को बचाया जा सके और किसानों के बच्चे बाहर जाकर काम करने के बजाय खेती का विकास कर सकें। क्योंकि अगर किसानों के बच्चे भी विदेश में रहेंगे तो पंजाब की खेती की देखभाल कौन करेगा।

दूसरी ओर, बच्चों के पिता मुकेश चंद्र और किसान नेता का कहना हैं कि गांव में उनकी करीब 40 किले खेती है, जबकि ठेके पर ली हुई खेती को मिलकर करीब 150 किले खेती पर काम करते हैं। उनके मुताबिक, उनके बच्चे अब खेती पर ध्यान दे रहे हैं। बच्चे यह नहीं चाहते कि वह विदेश में जाकर काम करें। उनका कहना है कि उनके बच्चे भी देखते है कि किसान अपनी मांगों को लेकर आए दिन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बच्चों का कहना है कि वे विदेश जाकर अपनी खेती नहीं करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, अगर सरकार किसानों का साथ दे तो किसान अपने बच्चों को कभी विदेश नहीं भेजेंगे। बल्कि उनके बच्चों को भी पंजाब में खेती में उनकी मदद करनी चाहिए।

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