जालंधर,ENS: पंजाब के सीएम भगवंत मान और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के शहर में दौरे से पहले पंजाब रोडवेज के पनबस और पीआरटीसी मुलाजिमों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पुतला फूंक प्रदर्शन किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के जालंधर दौरे से पहले बस अड्डे पर उनका पुतला फूंका और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान दविंदर सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से जो उनकी जायज मांगे है वह मानी नहीं जा रही। उन्होंने कहा कि पुतला फूंकने का मकसद यह है कि 14 यानि आज की सीएम मान ने मीटिंग रखी हुई थी। जिसमें आज भी उनके द्वारा पंजाब रोडवेज के मुलाजिमों के साथ मीटिंग नहीं की गई। जिसके कारण उन्होंने सीएम मान का पुतल फूंक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मान सरकार को 20 सितंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया गया है।
अगर हमारी बाते ना मानी गई तो हो सकता है कि हम तेज संघर्ष किया जाएगा। जिसमें हो सकता है कि चक्का जाम किया जाए या हो सकता है कि 18 डिप्पू बंद कर दिए। हो सकता है कि किसी चौंक को बंद कर दिया जाए। यह 20 तारीख के बाद अपनी कर्मियों से बात कर फाइनल किया जाएगा। जिसमें पनबस और पीआरटीसी के के डिप्पू शामिल है। संदीप सिंह ने कहा है कि काफी समय से मान सरकार हमारी मांगो को पूरा नहीं किया जा रहा। मान सरकार ने मीटिंग का 14 सिंतबर का समय दिया था। लेकिन आज भी उनकी ओर से मीटिंग नहीं की गई। उन्होंने कहा कि हमारी मांगों में सैलेरी में जो 5 प्रतिशत बढ़ौतरी करने का कहा गया वह भी नहीं की गई।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही चेतावनी जारी कर रखी थी कि 14 सितंबर की मीटिंग से यदि मुख्यमंत्री पीछे हटे तो वह बसों का चक्का जाम कर देंगे। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अब 20 सितंबर को मीटिंग दिए जाने के कारण फिलहाल चक्का जाम का कार्यक्रम टाला गया है। हालांकि इससे पहले भी टाइम देकर 3 बार मीटिंग रद्द की जा चुकी हैं। यूनियन के सीनियर प्रदेश उप प्रधान दलजीत सिंह जल्लेवाल एवं बलविंदर सिंह रथ ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास रैली में 1064 सरकारी बसें लेकर जाने वाले कर्मचारियों से मुलाकात के लिए समय नहीं है। यूनियन नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार परिवहन विभाग को चलाने में फेल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री भगवंत, जिन्हें कर्मचारियों ने सत्ता की चाबी सौंपी थी वह अब कर्मचारियों से बात करने की बजाय भाग रहे हैं।
रोडवेज कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पिछले कल ही सरकार ने अमृतसर रैली के लिए लगभग 1064 पनबस और पीआरटीसी बसों को लोगों को लाने-ले जाने के लिए लगाया था। उन्होंने कहा कि रोडवेज के कर्मचारियों को केवल राजनीतिक रैलियों में लोगों को ले जाने के दौरान याद किया जाता है, लेकिन सरकार के पास इन कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने के लिए समय नहीं है। जालंधर 1 और 2 डिपो के गेट पर बोलते हुए राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष दलजीत सिंह जल्लेवाला कहा कि पंजाब में परिवहन विभाग की हालत यह है कि पंजाब सरकार पिछले दो सालों के दौरान एक भी नई बस नहीं खरीद पाई है। यहां तक कि बसों को रूट और समय सारिणी दी गई है उस पर पर भी ट्रांसपोर्ट माफिया राज पूरी तरह से काबिज है और हावी है।
उन्होंने कहा कि रोडवेज की हालत यह है कि एक तरफ सरकार इसे कमाऊ पूत कहती है और दूसरी तरफ कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देती है। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें सैलरी नहीं मिली है। महासचिव चानण सिंह, रणजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह भुल्लर, भूपिंदर सिंह फौजी, दविंदर सिंह, मलकीत सिंह कुलविंदर सिंह, चरणजीत सिंह, हरजिंदर सिंह, सुखदेव सिंह ने कहा कि लंबे समय से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को अभी तक पक्का नहीं किया जा रहा है, उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है। समान काम, समान वेतन लागू नहीं किया जा रहा है। बर्खास्त कर्मचारियों को बहाल नहीं किया जा रहा है।