जालंधर, 30 जनवरी 2026: जालंधर के पी.ए.पी. ग्राउंड में पोस्ट-मैट्रिक वजीफा पंजाब योजना के तहत अनुसूचित जाति (एस.सी.) वर्ग के 2.7 लाख से अधिक विद्यार्थियों को वजीफा वितरण की शुरुआत के मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘रंगला पंजाब’ मिशन के तहत 271 करोड़ रुपये का पोस्ट-मैट्रिक वजीफा अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस, अकाली और भाजपा सत्ता में रहते हुए अपने परिवारों के हित साधती रहीं, जबकि दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी केवल पंजाब के नौजवानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दे रही है।
साल 2020-21 के मुकाबले लाभार्थियों की संख्या में 35 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बढ़ोतरी सरकार के शिक्षा सुधारों की स्पष्ट गवाही देती है। उन्होंने कहा कि स्कॉलरशिप केवल वित्तीय सहायता नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है। सरकार ने इस योजना के साथ वर्षों से अनदेखी किए गए सिस्टम को दुरुस्त करने का बड़ा प्रयास किया है, क्योंकि पहले फंड जारी करने में देरी और दुरुपयोग के कारण कई विद्यार्थी परीक्षाओं में बैठने से वंचित रह जाते थे।
एक्स पर कार्यक्रम के अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज जालंधर के पी.ए.पी. ग्राउंड से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी गई, जिससे राज्य भर के 2.7 लाख से अधिक बच्चों को वजीफा वितरण की शुरुआत हुई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। साल 2020-21 के मुकाबले 2024-25 में स्कॉलरशिप पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह स्कॉलरशिप केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का शक्तिशाली साधन है। कोशिश यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे या पैसों की कमी के कारण अपने सपनों को छोड़ने के लिए मजबूर न हो।
स्कॉलरशिप वितरण समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घोटालों से लेकर ‘रंगले पंजाब’ तक, पोस्ट-मैट्रिक वजीफा योजना सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन गई है। इस योजना ने अनुसूचित जाति के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान भरने के लिए पंख दिए हैं, जो आज उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर मौजूद लाभार्थियों ने तालियों की गूंज के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
साल 2017 से 2020 के समय को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौरान यह स्कीम लगभग ठप हो गई थी, जिस कारण शिक्षा संस्थानों ने विद्यार्थियों की डिग्रियां रोक ली थीं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत घोटाला हुआ था और कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए बने फंड हड़प लिए गए, जिससे उन्हें सही अवसरों से वंचित किया गया।
शिक्षा की महत्ता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कमजोर और पिछड़े वर्गों की तकदीर बदलने का एकमात्र रास्ता शिक्षा है। दुर्भाग्य से पहले की सरकारों ने जान-बूझकर इन विद्यार्थियों को किताबों से दूर रखा, जबकि आज हमारी सरकार उन्हें अपने सपने साकार करने और जिंदगी में बुलंदियों को छूने का मौका दे रही है। उन्होंने माता-पिता को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और कुर्बानियां बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
मुख्यमंत्री ने स्टेज से संत राम उदासी की कविता ‘मघदा रहैं वे सूरजा कम्मियां दे विहड़े’ भी साझा की और कहा कि यह कविता लोगों को सदा मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने नौजवानों से अपील की कि वे अपनी जिंदगी में लक्ष्य तय करें और सख्त मेहनत से उन्हें हासिल करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य पंजाब के हर कोने में शिक्षा का प्रकाश फैलाना है और यह बाबा साहिब अंबेडकर के उस विश्वास को साकार करती है कि शिक्षा सामाजिक असमानता को खत्म करने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।
उन्होंने बताया कि यह योजना 2.50 लाख रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों के अनुसूचित जाति विद्यार्थियों के लिए है और इसे पूरे पंजाब में पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है। इसके बजट को 245 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 271 करोड़ रुपये किया गया है। पहली बार धोखाधड़ी रोकने के लिए विद्यार्थियों, संस्थाओं और नोडल अधिकारियों के लिए बायो-प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. अंबेडकर स्कॉलरशिप पोर्टल पर जवाबदेही वाली व्यवस्था शुरू की गई है। उन्होंने दोहराया कि पोस्ट-मैट्रिक वजीफा पंजाब केवल वित्तीय सहायता नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता का रास्ता है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना पैसों की कमी के कारण अधूरा न रहे।
