जालंधर, ENS: 2 फरवरी 1986 दौरान नकोदर में कुछ शरारती लोगों द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 5 पावन स्वरूप अग्नि भेंट किए गए थे। यह घटना गुरुद्वारा गुरु अर्जन देव जी, मोहल्ला गुरु नानकपुरा में हुई थी। यह अध्याय भी 2015 में बरगाड़ी में हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी जैसा कांड था। इस घटना को आज पूरे 40 साल हो चुके हैं, लेकिन इस दर्दनाक घटना में शहीद हुए चार सिख नौजवानों के परिवारों को अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया। न ही यह घटना किसी बड़े पंथक मुद्दे के रूप में उभर सकी।
मामले की जानकारी देते हुए बलदेव सिंह ने कहा कि बीते चार दशकों में पंजाब में 8 मुख्यमंत्री बदले, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मामले में न्याय दिलाने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 वर्षों में 10 SGPC अध्यक्ष बने लेकिन किसी ने भी पीड़ित परिवारों की बांह नहीं पकड़ी है। इस घटना में शहीद हुए 4 नौजवानों में शामिल थेरविंदर सिंह लित्तरांहरमिंदर सिंह रायपुर चालूपुरबलधीर सिंह रामगढ़झिलमण सिंह गोरसियांइन शहीदों के माता-पिता न्याय की आस में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
चार शहीद नौजवानों में से अब केवल शहीद रविंदर सिंह लित्तरां के पिता बापू बलदेव सिंह ही जीवित हैं। वे हर साल कनाडा से भारत आकर चारों नौजवानों की संयुक्त बरसी मनाते हैं। ये चारों नौजवान उस समय ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन में सक्रिय थे। बलदेव सिंह के अनुसार, मार्च 1986 तक SGPC के प्रधान रहे जथेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा ने इस घटना की जांच के लिए कमेटी बनाई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।उन्होंने कहा कि 15 वर्षों तक पंजाब में पंथक सरकार भी रही और प्रकाश सिंह बादल कई बार मुख्यमंत्री बने, फिर भी इंसाफ की कोई पहल नहीं हुई।
उनका कहना है कि जब संगत अग्नि भेंट हुए स्वरूपों को श्री गोइंदवाल साहिब ले जाने के लिए आगे बढ़ी, तब पंजाब पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के गोलियां चला दीं। इस फायरिंग में चार सिख नौजवान शहीद हो गए। उस समय जालंधर के एडीसी दरबारा सिंह गुरुएसएसपी इजहार अली तैनात थे। आज भी न्याय की प्रतीक्षा 40 साल बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठे हैं। बलदेव सिंह ने मांग की कि इस कांड की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।
