परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, बेटे का शव देख मां हुई बेसुध
जालंधर: जालंधर के गोराया में उस समय मातम छा गया जब रूस में युद्ध के दौरान मारे गए दिव्यांग युवक मनदीप का शव करीब ढाई साल बाद गांव पहुंचा। बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गई, वहीं पिता और अन्य परिजनों की हालत बेहद दर्दनाक बनी हुई है। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों के अनुसार गोराया निवासी मनदीप बेहतर भविष्य की तलाश में करीब ढाई वर्ष पहले विदेश गया था। उसने परिवार के साथ कई बड़े सपने सांझा किए थे, लेकिन किसे पता था कि वह सपना एक दिन इस तरह टूट जाएगा। परिवार बीते दो वर्षों से लगातार मनदीप के लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था।
मनदीप के भाई ने मीडिया से बातचीत करते बताया कि मनदीप को रूस में कथित तौर पर जबरन सेना में भर्ती कर लिया गया था। युद्ध के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन काफी समय तक परिवार को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि वह कई बार रूस गए और हाल ही में डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें शव का डीएनए मनदीप से मेल खा गया। इसके बाद रूस सरकार द्वारा शव को परिवार को सौंपा गया।
परिवार ने बताया कि मनदीप दिव्यांग था, इसके बावजूद उसे युद्ध क्षेत्र में भेजा गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है। शव जब एक डिब्बे में बंद होकर गोराया पहुंचा, तो पूरे परिवार का सब्र टूट गया। मां अपने बेटे की तस्वीर से लिपटकर लगातार रोती रही।
गांव के लोग और रिश्तेदार बड़ी संख्या में परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और ऐसे युवाओं को विदेश में फंसाने वाले एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।