वाहनों सहित पैदल राहगीर हो रहे परेशान, हाईकोर्ट के आदेशों पर चला पीला पंजा
जालंधर, ENS: लतीफपुरा में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दिसंबर 2022 में अवैध मकानों को गिराया था, जिसके बाद स्थानीय लोग सड़क पर कब्जा कर विरोध कर रहे थे और केस हाईकोर्ट में पहुंचा था, जहां इसी स्थिति को देखते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे कि कब्जों को हटाया जाए। डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर मंगलवार सुबह 4:00 बजे से ही लतीफ पूरा एरिया की नाकाबंदी कर ली गई थी। कब्जे को खाली करवाने के लिए नगर निगम टीम ने पुलिस की मदद ली। जिला प्रशासन ने 9 फरवरी तक कोर्ट से कब्जे हटाने का समय मांगा था और आज 10 फरवरी को कोर्ट में अपना जवाब दायर करना था। उससे पहले यहां पर कार्रवाई कर दी गई है।
लतीफपुरा में 100 से ज्यादा पुलिस कर्मी पहुंचे ताकि कब्जे को खाली करवाते समय किसी प्रकार की कोई परेशानी न आ सके। पुलिस टीमें और निगम की टीमें मौके पर पहुंच गई है, जहां पुलिस ने लतीफपुरा के आने वाले चारों रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया है और किसी को भी अंदर जाने से मनाही है, जहां निगम व पुलिस टीम सड़क पर अवैध कब्जा करके बैठे लोगों के कब्जे खाली करवाएगी।
मामले की जानकारी देते हुए महिला ने कहा कि वह सेंट्रल गर्वमेंट की कर्मी है और बीएसएनएल की इमारत में उनका दफ्तर है। ऐसे में 9 बजे दफ्तर जाने का समय है, लेकिन उन्हें वाहन छोड़कर पैदल भी जाने नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि ऐसे में वह दफ्तर नहीं पहुंचेगी तो सरकारी दफ्तर में आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों के फाइनल एग्जाम चल रहे है। ऐसे में इस रास्ते से ना जाने की वजह से उन्हें स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद टैंट में रह रहे कब्जाधारियों को उठाने का पुलिस प्रयास कर रही है। बाहर से विरोध करने के लिए लोग न आ सकें, इसके लिए पुलिस ने लतीफापुरा की कब्जे वाली जगह के आस पास बैरिकेडिंग कर दी है। किसी को भी आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। बता दें कि पुलिस ने 9 दिसबंर 2022 को भारी पुलिस फोर्स के साथ सारे इलाके को सील कर दिया था।
तब भी सुबह ही प्रशासन की टीम इलाके में बने अवैध घरों को गिराने के लिए पहुंची थी। इसके बाद लोग उनके साथ उलझ गए थे। लोगों का कहना था कि वह अपने घर खाली नहीं करेंगे बेशक उनके ऊपर से मशीनें गुजार दी जाएं।लतीफपुरा के लोगों के समर्थन में किसान संगठनों सहित कई राजनीतिक दल समर्थन में आए थे। किसानों की भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बहसबाजी हुई थी।
