मां बोली- टूरिस्ट वीजा पर गया था गुरसेवक, अब मौत के मुंह में फंसा
जालंधर, ENS: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में कई भारतीय रूस की आर्मी में फंसे हुए है। दरअसल, भारतीय युवाओं को नौकरी का लालच देकर झूठे वादों के सहारे रूसी सेना में शामिल किया जा रहा है। एक माह पहले ही जालंधर का गुरसेवक टूरिस्ट वीजा पर गया। गुरसेवक की मां ने बताया कि उनका बेटा 19 अगस्त को रूस गया था। जिसके बाद उसने रूस में मंगेतर सुमन को भी वहां बुला लिया। गुरसेवक की मां ने चैनल से फोन पर बात करते हुए बताया कि वीजा खत्म होने के बाद उसे वहां कोई लड़का मिला। जिसने उसका वीजा एक साल एक बढ़ाने को लेकर बात की और उसे कंपनी में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद उसकी मुलाकात आर्मी की अधिकारी से लड़के ने करवाई दी। जिसके बाद उसे धोखे से कांट्रेक्ट करवाकर आर्मी में भर्ती करवा दिया गया।
मां ने कहा कि उसने तो बेटे को टूरिस्ट वीजा पर भेजा था। लेकिन उसके क्या पता था कि वह वहां पर मौत के मुंह में चला जाएगा। मां ने कहा कि घर के हालात सुधारने और पैसे अधिक कमाने के लालच में वह मौत के मुंह में फंस गया है। गुरसेवक के साथ मां की 10 सिंतबर को आखिरी बार फोन पर बात हुई है। मां ने बताया कि आज उसका बेटे से फोन पर कोई संपर्क नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहाकि बेटे ने तो आर्मी में भर्ती होने को लेकर कुछ नहीं बताया, लेकिन सुमन ने परेशान होकर सारी दास्तां उन्हें बताई। परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए बेटे और होने वाली बहू को भारत वापिस लाने की अपील की है।
बता दें कि बीते दिन गुरसेवक ने वीडियो कॉल के जरिए चैनल से बात करते हुए कहा कि लोगों को विजिटर वीजा देने के बहाने उन्हें आर्मी में भर्ती करवाया जा रहा है। ऐसे में झूठा लालच देकर 14 भारतीयों को रूस आर्मी में भर्ती किया गया। जिसमें से 8 भारतीय को जंग में लड़ने के लिए फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया है। जबकि गुरसेवक सहित 6 युवकों को जल्द फ्रंट लाइन में भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। वहीं आज रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती मामले में भारत के विदेश मंत्रालय ने नया बयान जारी किया है। भारत सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भारत सरकार ने एक बार फिर भारत के नागरिकों से आग्रह किया है कि वो यूक्रेन जंग के बीच रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफर को स्वीकार नहीं करें क्योंकि यह खतरे से भरा रास्ता है। रूसी सेना में भर्ती भारतीयों पर मीडिया के सवालों के जवाब में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक बयान जारी करके सरकार का पक्ष रखा है।
बयान में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि “हमने हाल ही में रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के बारे में रिपोर्टें देखी हैं। सरकार ने पिछले एक साल में कई मौकों पर इससे जुड़े जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है और उसके अनुसार भारतीय नागरिकों को आगाह किया है। हमने दिल्ली और मॉस्को, दोनों में रूसी अधिकारियों के साथ भी मामला उठाया है और अनुरोध किया है कि इस प्रैक्टिस को समाप्त किया जाए और हमारे नागरिकों को रिलीज किया जाए। हम प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ भी संपर्क में हैं। हम एक बार फिर सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफर से दूर रहें क्योंकि यह खतरे से भरा रास्ता है।”
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय ने इस साल की शुरुआत में भी कहा था कि, सरकार के ठोस प्रयासों की वजह से रूसी सेना में शामिल अधिकांश भारतीय नागरिकों को पहले ही छुट्टी दे दी गई है। इसके अलावा संबंधित रूसी अधिकारियों से अनुरोध किया गया कि वे अपनी सेना में बाकि बचे भारतीय नागरिकों के बारे में अपडेट प्रदान करें और उनकी सुरक्षा, भलाई और शीघ्र छुट्टी सुनिश्चित करें। इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री ने इस साल की शुरुआत में एक सवाल का जवाब देते हुए संसद में कहा था, “सरकार ने संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले सात भारतीय नागरिकों के शवों की वापसी की भी सुविधा प्रदान की है। ऐसे दो अन्य मामलों में, शवों का अंतिम संस्कार रूस में किया गया था। सरकार विदेश में सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और सहायता के लिए कोई भी अनुरोध प्राप्त होने पर उचित कार्रवाई करती है।”
