जालंधर, ENS: रूस-यूक्रेन में चल रहे युद्ध में जालंधर के गोराया का मनदीप आर्मी में शहीद हो गया था। करीब एक माह पहले 30 वर्षीय मनदीप का शव भारत पहुंचा था। जिसके बाद परिवार ने उसे शहीदी का दर्जा देने सहित प्रशासन के समक्ष अन्य मांगे रखी थी। जिसके कारण परिवार द्वारा मनदीप का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया गया। वहीं आज मनदीप कुमार का नम आंखों से अंतिम संस्कार कर दिया। दरअसल, परिवारिक सदस्य मांग कर रहे थे कि उनके भाई को इंसाफ दिया जाए और प्रशासन उनकी कोई वित्तीय मदद करें। काफी दिनों से मनदीप के शव को मोर्चुरी में रखा हुआ था। मगर आज परिवार ने उसे नम आंखों से विदाई दी। इस मौके पर जब परिवारिक सदस्यों के साथ बात करने की कोशिश की गई, तो कोई भी परिवारिक सदस्य कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ।
बता दें कि गोराया कस्बे का रहने वाला 30 वर्षीय मनदीप कुमार पिछले काफी समय से रूस में रह रहा था, जहां वह बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में गया था। परिजनों ने बताया की मनदीप ट्रैवल एजेंटों के झांसे में आ गया था। उसे नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर रूस भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचते ही परिस्थितियां बदल गईं। मनदीप कुमार 17 सितंबर 2023 को एक रिश्तेदार और तीन परिचितों के साथ आर्मेनिया के लिए रवाना हुआ था। मनदीप और उसके साथी अमृतसर से फ्लाइट के जरिए आर्मेनिया पहुंचे। उन्होंने तीन महीनों के लिए आर्मेनिया में मजदूरों के रूप में काम किया। 9 दिसंबर 2023 को वे रूस पहुंचे। हालांकि मनदीप कुमार रूस में ही रहा, जबकि उसका रिश्तेदार और तीन अन्य साथी भारत वापिस आ गए।
मृतक मनदीप के भाई जगदीप कुमार ने कहा कि वे अब यह जानकारी हासिल करेंगे कि उसके भाई को रूसी सेना में कैसे भर्ती किया गया था, क्योंकि उसका भाई दिव्यांग था और दिव्यांग व्यक्ति सेना में भर्ती होने के योग्य नहीं होते। वे अब इस मामले में विदेश मंत्रालय और रूसी सरकार से बात करेंगे और रूसी अदालत में मुकदमा भी दायर करेंगे। दरअसल, मनदीप के लापता होने के बाद उसके भाई जगदीप ने उसे ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किया। जगदीप खुद भी रूस गया और वहां अधिकारियों से संपर्क किया। इसके साथ ही उसने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के सामने भी मनदीप का मामला उठाया, ताकि उसे सुरक्षित भारत वापस लाया जा सके। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद परिवार को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई थी। काफी समय के बाद रूसी सेना में मनदीप की मौत की पुष्टि की जिसके बाद उसका शव जब भारत पहुंचा तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
