जालंधर, ENS: गोराया से रूस गए 30 वर्षीय मनदीप को जबरी आर्मी सेना में भर्ती किया गया, जहां वह शहीद हो गया। दो दिन पहले मनदीप का शव भारत पहुंचा। वहीं परिवार ने मनदीप का संस्कार करने से अब इंकार कर दिया है। दरअसल, 3 साल बाद मनदीप का शव ताबूत में भारत पहुंचा है। रूस-यूक्रेन युद्ध में उसकी 19 मार्च 2024 में गोली लगने के बाद मौत हो गई। छोटे भाई जगदीप ने मनदीप को जिंदा ढूंढने का 4 बार प्रयास किया मगर असफल रहा। कभी रशियन लैंग्वेज, कभी पैसा, कभी सरकार की पॉलिसी भाई को ढूंढने में बाधा बनती रही।
1 साल की मेहनत के बाद भाई मिला, लेकिन जिंदा नहीं। डेडबॉडी भी ऐसी जिसे पहचानना भी मुश्किल। जगदीप ने अपने भाई को रूस में ढूंढने का पूरा किस्सा सांझा किया। परिवार ने बताया कि 17 सितंबर 2023 को मनदीप ने घर की दहलीज से बाहर कदम रखा। आंखों में परिवार को गरीबी से निकालने के सपने लेकर अमृतसर के एयरपोर्ट से अर्मेनिया के लिए उड़ान भरी। उसके साथ उसकी जान-पहचान के 2 लोग और एक रिश्तेदार भी था। अर्मेनिया पहुंचने के बाद मनदीप ने यहां मजदूरी की। घर वालों से बराबर बात करता रहा।
यहां से तीनों ने रूस में आर्मी में काम की एड देखी। एक एजेंट ने इनको अच्छा पैसा दिलाने का झांसा दिया। परिवार ने बताया कि मनदीप दिव्यांग था। इसके बावजूद इसके एजेंट ने फौज में काम दिलाने का झांसा दिया। कहा गया कि उनको वॉर फ्रंट पर नहीं भेजा जाएगा। उनको सेना के लिए खाना तैयार करना होगा और हथियार ट्रकों में लोड करने होंगे। सभी को काम के बदले मोटा पैसा दिया जाएगा। मनदीप एजेंट की बातों में आ गया। काम करने आया था तो उसे काम में कोई बुराई नहीं लगी। रिश्तेदार और बाकी 3 साथियों को काम ठीक नहीं लगा और वो इंडिया लौट आए।
मनदीप के भाई जगदीप ने बताया कि उसके साथ काम करने वाले दिल्ली के युवक ने बताया कि मनदीप उनसे सीनियर कमांडर के अंडर था। यहां पर सभी लोगों को यही कहकर भर्ती किया गया था कि आपको फ्रंट लाइन से पीछे रहना है और सेना के लिए खाना और हथियार मुहैया करवाने हैं। जब उनको ट्रेनिंग दी जाने लगी तो सभी ने विरोध जताया। इस पर एजेंट ने कहा कि ये ट्रेनिंग तुम्हारे सेफ्टी पर्पज के लिए है। हम ट्रैप में फंस चुके हैं, इसका खुलासा तब हुआ जब उनको गाड़ी में बैठाकर यूक्रेन के बॉर्डर पर लड़ने के लिए छोड़ दिया गया।
रूस पहुंचने वाला मनदीप कुमार 18 जनवरी को रूसी आर्मी में काम पर लगा। भाई जगदीप के अनुसार- भाई को धोखे का पता चला तो उसने काम छोड़ना चाहा। मगर अंकित डोंकर (ट्रैवल एजेंट) ने मारपीट की। मनदीप ने सारी कहानी की वीडियो बनाकर भेजी और बताया कि अंकित डोंकर ने 12 और लोगों को उसके साथ भर्ती करवाया है। अंकित डोंकर को जनवरी 2025 में अमृतसर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अंकित डोंकर सहित उसके साथियों के खिलाफ मनदीप के भाई जगदीप ने थाना गोराया में 2023 को FIR दर्ज करवाई थी।
राजस्थान में भी केस होने के चलते राजस्थान पुलिस अंकित डोंकर को लेकर चली गई थी। 3 मार्च 2024 को मनदीप की अंतिम बार भाई जगदीप से बात हुई। उसने बताया कि उसे रूस की सेना ने रेड लाइन पर भेज दिया है। शायद ही वह जिंदा वापिस आ पाए। इसके बाद उससे कभी संपर्क नहीं हो पाया। भाई जगदीप कुमार ने बताया कि 3 मार्च 2024 को लास्ट टाइम फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद वह मनदीप के साथ फिर कभी बात नहीं कर पाया। जगदीप ने कहा जब काफी समय बीत जाने के बाद भाई के साथ कॉन्टेक्ट नहीं हुआ तो शक हुआ। इसके बाद पिता उसे ढूंढने के लिए रूस गए। मगर 1 महीना वहां रहकर उसे ढूंढ नहीं पाए।