- जालंधरः मोहाली के फेज-11 स्थित एसआरपी यूएस लॉजिस्टिक कंपनी के दफ्तर में हुए डिंपल मर्डर केस के रोष में कांग्रेस ने लोगों के सहयोग से कैंडल मार्च निकाला। इस मौके पर लोगों ने हाथ में डिंपल को इंसाफ दिलाने के नारे लिखे पोस्टर पकड़े थे। लोगों ने कहा कि डिंपल पूरे समाज की ही बेटी थी। डिंपल के कातिलों को मौत की सजा मिलनी चाहिए।
डिंपल की तरह ही कई बेटियां नौकरी और पढ़ाई के लिए बाहर निकलती हैं। मृतका के माता-पिता और परिवार के साथ समाज की हमदर्दी है। लोगों ने एक सुर में कहा कि आरोपी हरविंदर सिंह मान उर्फ हैरी को जल्द से जल्द फांसी पर लटाया जाना चाहिए।
कैंडल मार्च में शामिल जालंधर के पूर्व विधायक और कांग्रेस जिला प्रधान राजेंद्र बेरी ने कहा कि दिनकर समाज की ओर से कैंडल मार्च निकाला गया, हम उसमें शामिल हुए हैं। जिसमें सबकी यही मांग है कि डिंपल, जिसका सरेआम कत्ल किया गया, उसके हत्यारों को कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
एसआरपी कंपनी के कर्मचारियों ने भी इस केस में साथ नहीं दिया। हमलावर अकेला था और वहां इतने लोग थे कातिल कोपकड़ना चाहिए था। यदि ऐसा होता तो, लड़की की जान बच सकती थी। पंजाब सरकार से यही मांग है कि कंपनी के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाया जाना चाहिए और लड़का जिसने हत्या की है, उसको कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
कौंसलर शैरी चड्ढा ने कहा कि दिनकर समाज के प्रधान महिंदर और उनकी पूरी टीम की ओर से एक विशाल कैंडल मार्च निकाला है। पिछले दिनों पटियाला शहर में एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, जहां समाज के साथ सभी लोग आकर खड़े हो गए थे। डिंपल था किसी एक समाज की बेटी नहीं थी, बल्कि वह हमारी अपनी बच्ची थी।
अगर ऐसे हालात रहे, तो आने वाले समय में लोग अपनी बेटियों को कैसे पढ़ाएंगे-लिखाएंगे ? आज समाज में जो डर का माहौल पैदा हो गया है, उससे लोग सहम गए हैं, क्योंकि आगे भी सबकी बेटियों को स्कूलों में पढ़ने जाना है या नौकरियों पर जाना है। मासूम बच्ची की गर्दन पर 30 से 35 वार किए गए। ऐसे दरिंदे को हम कम से कम फांसी की सजा दिलवाकर ही रहेंगे।
दिनकर समाज कोई छोटा-मोटा समाज नहीं है, यह हमारा अपना परिवार है, हमारे अपने लोग हैं। आज यह रोष केवल जालंधर तक सीमित नहीं है। जालंधर के साथ-साथ लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और मुंबई तक हमारा समाज फैला हुआ है।
इस मामले में हत्यारे को फांसी की सजा दिलवाएंगे। इसके साथ ही, जिस कंपनी में बच्ची नौकरी करती थी, वहां के सुरक्षा गार्डों और वहां काम करने वाले अन्य लोगों की भारी लापरवाही सामने आई है।
अगर वे लोग मुस्तैदी दिखाते, तो बच्ची को बचाना कोई बड़ी बात नहीं थी। सिर्फ एक चाकू ही तो था, उसे काबू करके बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन उनकी इसी नालायकी के कारण आज हमारी बच्ची की जान चली गई। हम समाज के साथ पूरी तरह कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
