जालंधर, ENS: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर में हुई रैली के दौरान एक बड़ा और दुखद हादसा सामने आया है। रैली में पहुंचे भाजपा के कैंट हलके के नेता रजनीश सहगल की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। आनन-फानन में उन्हें संभालने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुके थे। ऐसे में परिवार के साथ दुख सांझा करने दीपक बाली पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार के साथ दुख सांझा किया। वहीं उन्होंने एलपीयू में बच्चों के प्रदर्शन को लेकर दीपक बाली ने कहाकि बच्चों के कुछ मसलों को दबाया जा रहा था। ऐसे में गुस्से का गुब्बारा फट गया। ऐसे में यूथ है और यूथ एंगरी ज्यादा होता है, इसी के चलते यूथ भड़क गया। इस दौरान सीबीआई जांच पर बाली ने कहा कि पुलिस द्वारा मामले को लेकर एसआईटी बनाई गई है और वह उसकी जांच कर रही है।
उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि जब आंदोलन को बंद करना था और पुलिस ने जब आकर बच्चों को रोका था, उस समय भी सीबीआई को बुला लिया जाता। ऐसे में अब मसला खत्म हो गया और स्टूडेंट्स शांत हो गए। इस दौरान पुलिस ने मसल को खत्म कर दिया तो सीबीआई जांच की बात सामने आ गई। उन्होंने कहा किए एलपीयू में सख्त पाबंधी है और सिक्योरिटी है, ऐसे में एलपीयू के अंदर कोई बाहरी व्यक्ति जा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि बाहर से कहां से लोग आ गए, यह सब एलपीयू के स्टूडेंट्स ही थे। बाली ने कहाकि अशोक मित्तल को अपनी मैनेजमेंट की गलती पर ध्यान देना चाहिए ना कि ऐसी बाते करनी चाहिए।
बच्चो के प्रति मेरी मैनेजमेंट का रवैया ठीक है। बता दें कि कैंट हलके के रजनीश सहगल मौत से पूरे इलाके और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक नेता अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बच्चे छोड़ गए हैं, जिनमें सबसे छोटा बेटा महज 10 वर्ष का है। इस पूरी घटना और रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंजाब को लेकर दिए गए बयानों पर नेता दीपक बाली ने तीखा पलटवार किया है। दीपक बाली ने कहा कि भाजपा नेता हर चुनाव में नए-नए जुमले लेकर आते हैं। उन्हें न तो पंजाब का पता है, न पंजाबी का और न ही पंजाबियत का।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दीये तले अंधेरा वाली कहावत इन पर पूरी तरह फिट बैठती है। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा आने के बड़े दावों की बात करने वाले गृह मंत्री को पहले अपने खुद के राज्य गुजरात को देखना चाहिए। गुजरात में पिछले 25 वर्षों से उनकी सत्ता है और जिस ‘गुजरात मॉडल’ का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहां आए दिन टनों के हिसाब से ड्रग्स पकड़ी जा रही है। कल भी वहां से 526 किलो ड्रग्स पकड़ा गया है। अगर सरकार वाकई गंभीर है, तो उन्हें सबसे पहले गुजरात की बंदरगाहों और उस नेटवर्क पर नकेल कसनी चाहिए जहां से असल में ड्रग्स सप्लाई होती है।