जालंधर, ENS: मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मन की मौत मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा गठित नए मेडिकल बोर्ड की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि जब पहला बोर्ड लापरवाही की पुष्टि कर चुका है तो दूसरे बोर्ड की जरूरत क्यों पड़ी? कोर्ट ने इस मामले में सरकार से 19 मई, 2026 तक जवाब मांगा है। वहीं इस मामले को लेकर हरजिंदर सिंह रब्बी बाजवा ने कहाकि आज एक नया बोर्ड गठित किया गया। आरोप है कि डॉक्टरों को बचाने के लिए बोर्ड गठित किया गया।
रब्बी ने कहाकि सरकार वरिंदर घुम्मन की लैगेसी को जिंदा रखने के लिए उसके नाम पर पार्क बना रही है और सरकार उनके नाम पर स्टैचू बना रही है। वहीं दूसरी तरफ फोर्टिस अस्पताल को बचाने के लिए दूसरा फ्रैश बोर्ड गठित किया गया, जिस पर आज हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और इस पर स्टे लगा दिया है। इस पर 19 मई, 2026 तक जवाब मांगा है। रब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नए बोर्ड को जल्द रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने सीएम मान से अपील की है कि वह मामले में खुद संज्ञान लें और निष्पक्ष जांच करवाकर परिवार को इंसाफ दिलाए। दरअसल, पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली अस्पताल प्रबंधन और आरोपी डॉक्टरों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर दोबारा जांच बिठाई थी।
घुम्मन के परिजन भुपिंदर सिंह ने अपनी वकील मेहर सचदेव के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दूसरे मेडिकल बोर्ड के गठन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब पहले ही एक सात सदस्यीय बोर्ड डॉक्टरों को दोषी ठहरा चुका है तो स्वास्थ्य निदेशक को नया बोर्ड गठित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों में दम पाया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पहले बोर्ड के सात विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच के बाद इलाज में लापरवाही पाई और जिम्मेदार डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक किए, तो सरकार के पास ऐसे कौन से नए तथ्य सामने आए जिसके आधार पर दूसरी बार जांच के आदेश दिए गए?