जालंधर, ENS: मकसूदां थाना पर 2018 में हुए ग्रेनेड अटैक के आरोपियों को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत से मुख्य 3 आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आमिर नजीर, शाहिद और फाजिल बसीर शामिल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। दरअसल, एनआईए की जांच में यह साफ हो चुका है कि आरोपी खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे। वह पंजाब में आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। तीनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं और जेल में बंद हैं। इस मामले में एनआईए चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह फैसला मामले की गंभीरता, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े आरोप और सबूतों को देखते हुए लिया गया है।

एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 427, 153, 153ए, 153बी के साथ-साथ अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट की धारा 10, 13, 15, 16, 18, 20 और 23 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके मुताबिक 9 सितंबर 2018 को जालंधर के वेरका प्लांट के पास आतंकी संगठन के एक अज्ञात सदस्य से 4 हैंड ग्रेनेड एकत्र किए गए। उसके बाद 13 सितंबर को रूफ अहमद मीर और उमर रमजान कश्मीर से चंडीगढ़ हवाई जहाज के जरिए पहुंचे, जहां से वह सड़क मार्ग से जालंधर गए।
थाना मकसूदां पर चार हैंड ग्रेनेड से धमाके किए गए थे। इसमें बाद में पुलिस जांच में एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के दो कश्मीरी छात्र शाहिद और फाजिल बशीर को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक को जम्मू-कश्मीर के अवंतीपुरा से और एक को जालंधर से गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों आरोपियों का संबंध आतंकवादी संगठन गजवत-उल-हिंद से बताया गया था। संगठन के सरगना जाकिर राशिद भट उर्फ जाकिर मूसा की अगुवाई में पूरे देश में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी।