Sat, Jan 03, 2025, 20:57:41 PM
- Advertisement -
HomePunjabFaridkotJalandhar News: 11 साल की बच्ची बनी Lady Milkha, रेस जीत पिता...

Jalandhar News: 11 साल की बच्ची बनी Lady Milkha, रेस जीत पिता को दिलाई जमीन, देखें वीडियो

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

नवजोत दौड़ में अब तक 9वां साइकिल जीत चुकी

जालंधर/फरीदकोटः पंजाब के फरीदकोट के गांव सादिके की 11 साल की बच्ची नवजोत को लेडी मिल्खा का नाम मिल रहा है। ये बच्ची अब तक ग्रामीण खेलों में 100 मीटर की रेस में इतना पैसा जीत चुकी है कि पिता के लिए 8 मरले जमीन खरीदकर दे दी है। अब नया घर बनाकर देने का सपना है। शुक्रवार को जालंधर के गांव सराय खाम में हुई खेल प्रतियोगिता में भी फरीदकोट के सादिके गांव की इस बच्ची ने 100 मीटर की रेस में पहला स्थान पाकर जीत को कायम रखा है। अब तक ये बच्ची दौड़ में 9वां साइकिल जीत चुकी है।

पंजाब के अलग-अलग गांवों में खेल मेले करवाने वाले सोशल मीडिया एन्फुलेंसर पिंका जरग कहते हैं कि आने वाले 10 साल में पंजाब के हर तीसरे बच्चे को एथलीन बनाने का सपना देखा है। ये सपना साकार करना बहुत मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। पिंका कहते हैं कि मैं ये कसम खाकर निकला हूं कि पंजाब की धरती पर इतने बच्चों को गेम से जोड़ दूंगा कि पंजाब की धरती से नशे नाम का कलंक ही मिट जाए।

इसी के साथ इन खेलों में एक और बच्चा लाइमलाइट में आया है। इसका नाम राजू ढूडिके है। बच्चा मोगा के गांव ढूडिके का रहने वाला है। इसने अंडर 8 में 100 मीटर की रेस में 5वीं बार साइकिल जीता है। राज ढूडिके के बोलने के स्टाइल ने उसे गेम्स के साथ सोशल मिडिया का भी स्टार बना दिया है। हर सेंटेंस में बाधू यानी बहुत ज्यादा कहने के तकिया कलाम से इसे जाना जाने लगा है।

गरीब घर में पैदा हुई, पिता मजदूर
नवजोत कौर का जन्म पंजाब की मालवा बेल्ट के जिले फरीदकोट के गांव सादिके में हुआ है। उम्र अभी 10 साल है, लेकिन मुकाम बड़ा हासिल कर चुकी है। नवजोत कौर कहती है कि मेरी सभी बच्चों से अपील है कि वे मेहनत करें। अपने सपनों को सच करें और अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन करें। नवजोत कहती हैं कि वह आगे और भी ज्यादा मेहनत करेंगी। कोच के पास ट्रेनिंग लूंगी ताकि दुनिया भर की रेस में हिस्सा लेकर अपने सूबे और देश का नाम चमका सकूं।

पहली ट्राफी जीती तो घर के अंदर एक ईंट पर रखी
नवजोत के माता-पिता आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं। बाजजूद इसके नवजोत के पिता ने बच्ची को खेलों से पीछे नहीं किया। घर के कामों में नहीं लगाया। नवजोत को दौड़ लगाने के लिए पूरी खुराक का इंतजाम किया। नवजोत ने बताया कि जब उसने अंडर 8 में अपनी पहली ट्रॉफी जीती तो घर में ट्रॉफी रखने के लिए जगह तक नहीं थी। उसने अपनी पहले ट्रॉफी को एक ईंट पर रखा था। अभी भी नवजोत के घर में पहली ट्रॉफी है। हालांकि अभी लकड़ी का एक फट्टा दीवार में लगाकर उसे इस पर टिका दिया गया है।

घर बनाकर सबसे पहले ट्राफी के लिए शोकेस बनबाउंगी
नवजोत के हौसले बड़े हैं और सपने भी। नवजोत अपना घर बनाने के इरादे से हर रेस को जीतने के लिए सुबह 5 बजे उठकर रेस की प्रेक्टिस करती हैं। रोजाना ग्राउंड में दौड़ती हैं। नवजोत से जब पूछा गया कि अगर आपने अपना घर बनाया तो उसमें क्या खास बनाना चाहेंगी। इस पर नवजोत मासूमियत से जवाब देती हैं कि जब भी घर बनाऊंगी तो उसमें अपनी ट्राफियां रखने के लिए बड़ा सा शोकेस बनवाउंगी। नवजोत का ये जवाब सुनते ही उसके माता-पिता सहित सबकी आंखें नम हो जाती हैं।

बच्ची हमारे नाम से नहीं हम बच्ची के नाम से जाने जाते हैं
हम अपनी बच्ची की मेहनत से बहुत खुश हैं। हम चाहते हैं कि सभी बच्चे इसी तरह मेहनत करें। हमने अब तक गरीबी ही देखी है। इस बच्ची ने हमें गरीबी की दलदल से बाहर निकाला है। गांव में और शहर में अब लोग हमें हमारी बच्ची के वजह से पहचाने लगे हैं। जब भी कहीं जाते हैं तो लोग कहते हैं कि आप नवजोत के माता-पिता हैं। ये सुनकर दिल को बहुत सुकून मिलता है। आज हमारी बच्ची को हमारे नाम से नहीं बल्कि हमें अपनी बच्ची के नाम से जाना जाने लगा है। किसी भी माता पिता के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है। हम दुआ करते हैं कि पंजाब का हर बच्चा इसी तरह से अपने माता-पिता का नाम रोशन करे।

राजू शर्त लगाकर जीतता है रेस
मोगा के ढूडिके गांव का रहने वाला राजू अभी 8 साल का है। जहां भी पंजाब में दौड़ का कंपीटिशन होता है, ये वहां पहुंच जाता है। अब तक ये 100 मीटर की रेस में 5वीं बार साइकिल जीत चुका है। जालंधर के गांव सराय खाम में हुई रेस में भी राजू सबकी नजरों में रहा। मैदान पर राजू-राजू होती रही। दौड़ से पहले राजू ने पहले ही जीत का दावा कर दिया। राजू ने कहा कि वह गांव में कहकर आया है कि साइकिल लेकर आऊंगा, ये रेस वे ही जीतेगा।

खाली पेट दौड़ लगाकर भी सबसे आगे रहा
रेस से पहले राजू से जब पूछा गया कि आज क्या खाकर आए हो जो रेस जीतने के इतने दावे कर रहे हो, तो इस पर राजू ने बताया कि वह खाली पेट आया है। अब रेस जीतने के बाद ही कुछ खाउंगा। राजू ने कहा कि रेस जीतने के लिए उसने वार्मअप कर दिया है। अब मैदान को फतेह करके ही घर लौटना है और पूरे गांव में रेस में जीती गई साइकिल घुमानी है। जीत के बाद जब राजू से पूछा गया कि कैसा महसूस हो रहा है तो राजू ने कहा कि बहुत अच्छा। सबका धन्यावाद। जब राजू से पूछा गया की जीत का इतना हौसला आया कहां से तो उसने कहा कि मैं तो गांव में पहले ही 2-3 चक्कर काटकर प्रेक्टिस करके आया था। जीतता कैसे नहीं।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -

You cannot copy content of this page