जालंधर, ENS: आप पार्टी के सांसद सुशील कुमार रिंकू ने आज संसद भवन के बाहर जंजीरे पहन कर प्रदर्शन किया। इस दौरान सासंद सुशील रिंकू ने गुलामी की जंजीरो से देश को आजाद करने के अपील की है। सदन में दिल्ली सवा बिल की कापियां वेल में आकर फाड़ने के कारण उन्हें पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया गया है। आज उन्होंने केंद्र सरकार के विरोध का नया तरीका अपनाया। अपने आप को लोहे की जंजीरो में जकड़ कर आजाद करो…आजाद के नारे लगाए। सिर पर शहीद-ए-आजम वाली बसंती रंग की पगड़ी पहन कर रिंकू ने संसद भवन के बाहर चक्कर लगाया और संविधान निर्माता बाबा साहिब डॉक्टर भीम राम अंबेडकर की मूर्ति के आगे जाकर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वह अकेले ही अपने आप को लोहे की जंजीरे में बांध कर वहां पर प्रदर्शन कर रहे थे।
रिंकू जब संसद भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तो वहां पर राहुल गांधी भी आए। उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी थे। राहुल गांधी सुशील रिकूं के पास आए और उनसे हाथ मिलाया। राहुल गांधी ने वह रिंकू ने जो हाथ में बैनर थाम रखा था उसे भी गौर से देखा और पड़ा। इसके बाद मुस्कुराते हुए वहां से चले गए। दूसरे दलों के सांसद भी रिंकू के पास आकर उनके प्रदर्शन को देख रहे थे। रिंकू ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के संविधान कानून को गुलामी की जंजीरों में झकड़ रखा है। उन्होंने कहा कि देश में एक ऐसी सरकार है जो न संविधान को मानती है और न ही देश की सुप्रीम न्याय व्यवस्था में ही विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न मानकर अपनी सभी नियमों कानूनों को छींके पर टांग कर मनमर्जी से काम कर रही है।
मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में बयान पर अड़ा एकजुट विपक्ष जब सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया तो वो इसे अपनी बड़ी रणनीतिक सूझबूझ बता रहा था। पीएम के बयान न देने और मणिपुर में चाहे गए नियमों के तहत बहस की इजाजत न मिलने के चलते इंडिया गठबंधन ने संसद के दोनों सदनों में कई दिन कामकाज ठप रखा। सरकार को झुकते न देख उसने अपनी मांग मनवाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता चुना। मकसद था अविश्वास प्रस्ताव पर बहस में मणिपुर को केंद्र में रखा जाए और फिर पीएम से उसका जवाब मांगा जाए। ऐसे में पीएम को मणिपुर पर अपना तथाकथित ‘मौन’ तोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। राजनीतिक जानकार भी इसे विपक्ष की सरकार को गुगली मान रहे थे।
गौरतलब है कि मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच पिछले सौ दिन से नस्लीय हिंसा जारी है। इस हिंसा की आग में मणिपुर जल रहा है और उसकी तपिश देश-विदेश में महसूस की जा रही है। संसद का सत्र शुरू हुआ तो विपक्ष ने इसी मुद्दे पर सरकार को घेर लिया। विपक्ष एकजुट होकर पीएम मोदी के इसपर संसद के अंदर बयान की मांग कर रहा था। सरकार मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार थी लेकिन चर्चा किस नियम के तहत हो इसपर विपक्ष और सत्ता पक्ष में गतिरोध बना हुआ था जिसके चलते शुरुआत के कई दिन संसद के दोनों सदनों में कामकाज ठप रहा।