मोहालीः पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के खिलाफ जालंधर ईडी प्रवर्तन निदेशालय ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, 22 अगस्त 2025 को जालंधर स्थित ईडी दफ्तर ने मोहाली की स्पेशल कोर्ट (PMLA) में उनके खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत यानी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में धर्मसोत के साथ चार अन्य आरोपियों के नाम भी हैं। मिली जानकारी के अनुसार मामला मनी लॉन्ड्रिंग का है। यह पहली बार नहीं है जब धर्मसोत का नाम इस केस में आया है। इससे पहले 13 मार्च 2024 को ईडी ने उनके खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी।
उस केस में मोहाली की PMLA कोर्ट आरोप तय कर चुकी है। अब दूसरी चार्जशीट दाखिल होने के बाद धर्मसोत की कानूनी मुश्किलें और गहरी हो गई हैं। ईडी ने यह पूरी जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की FIRs के आधार पर शुरू की थी। ये FIRs भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत दर्ज हुई थीं। विजिलेंस ने आरोप लगाया था कि पंजाब के वन विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ियां हुईं। इन गड़बड़ियों में वन विभाग से जुड़े टेंडर, मंजूरियां और ठेकों में हेराफेरी जैसे मामले सामने आए।
धर्मसोत पर आरोप है कि उन्होंने अपने मंत्री रहते हुए वन विभाग से जुड़े टेंडरों और परमिट में अनियमितताएं कीं। उन पर यह भी आरोप है कि रिश्वत के जरिए अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग तक कराए गए। विजिलेंस ने जब जांच शुरू की, तब कई ऐसे मामलों का खुलासा हुआ जिनमें पैसों की हेराफेरी और काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) का खेल सामने आया।
इस केस में ईडी ने धरमसोत और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। बताया जाता है कि इन रेड्स के दौरान ईडी को कैश, प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मिले थे। इन्हीं सबूतों को आधार बनाकर एजेंसी ने पहले चार्जशीट दाखिल की थी और अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में दी है। धर्मसोत पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता रहे हैं। वह कई बार विधायक बने और वन मंत्री का पद भी संभाला। लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान ही भ्रष्टाचार के आरोप लगे और बाद में विजिलेंस व ईडी की जांच शुरू हुई। भ्रष्टाचार के मामलों के चलते उनकी साख पर भी बुरा असर पड़ा।