नॉनकंपाऊंडेबल हिस्से से आज से वसूला जाएगा प्रतिदिन जुर्माना!
जालंधर/वरुण/अनिल वर्मा: शहर में बन रही अनगिनत अवैध बिल्डिंगों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए निगम प्रशासन ने डैमोलेशन स्कायड टीम का गठन किया है इस टीम की कमान एटीपी सुखदेव वशिष्ट को सौंपी गई है यह टीम शहर के किसी भी कोने ने बन रही अवैध बिल्डिंग की रिपोर्ट सीधेतौर पर कमिशनर को करेगी तथा विभागिय कारवाई पूरी करने के बाद उक्त अवैध निर्माण को गिराने की कारवाई करेगी जिसकी शुरुआत आज सेदां गेट में बन रही एक बड़ी विवादित बिल्डिंग से की गई सेदां गेट में सब्जी की फड़ी लगाने वाले के पीछे एक रिहायशी मकान के अंदर ही अंदर बीते एक वर्ष पहले पूर्व एटीपी रजिंदर शर्मा की मिलीभगत से दो दुकानों का लैंटर डाल दिया गया मगर बाहरी दीवार को नहीं गिराया गया।
शिकायत मिलने के बाद पूर्व एटीपी रजिंदर शर्मा अपने चहेते आर्किटैक्ट के जरिए दुकानों का राजीनामा करने के लिए फाईल जमा करवाई जिसे पूर्व कमिशनर करनेश शर्मा ने रिजैक्ट कर दिया। यह फाईल जनवरी 2022 को रिजैक्ट की गई थी मगर इसके बाद पूर्व एटीपी ने अवैध निर्माण के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की और फाईल को दबा कर रखा। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्राप्टी मालिक ने फरवरी 2023 में फ्रंट की दीवार गिरा कर आगे नया निर्माण शुरु कर दिया।
तब इस सैक्टर में तैनात रहे एटीपी सुखदेव वशिष्ट के पास शिकायत पहुंची तो उन्होने काम बंद करवा दिया और दोबारा शौकास नोटिस जारी कर दिया। मगर इस प्राप्टी मालिक ने आप नेता की सिफारिश पर अवैध निर्माण जारी रखा और देखते ही देखते पहली मंजिल पर भी लैंटर डाल दिया गया और बाहरी दो ब़ड़े ब़डे शटर लगा दिए गए।
इस सबंधि निगम कमिशनर स्तर पर भी शिकायतें पहुची मगर काम बंद नहीं हुआ जिसके बाद सैक्टरी लैवल तक शिकायतें पहुंची जिसके बाद निगम प्रशासन हरकत में आया और आप नेता को दरकिनार कर अवैध निर्माण पर डिच मशीन चलाने के आदेश दिए गए।
निगम प्रशासन वसूलेगा नॉनकंपाऊंडेबल बिल्डिंग से प्रतिदिन जुर्माना
इस टीम द्वारा गिराए जाने वाले हर अवैध निर्माण के मालिकों को दो नोटिस जारी किए जाएंगे जिनमें एक नोटिस डैमोलेशन का होगा और दूसरा बिल्डिंग के नॉनकंपाऊंडेबल हिस्से से प्रतिदिन जुर्माना वसूलने का होगा। अगर प्राप्टी मालिक यह नोटिस मिलने के बाद अपनी बिल्डिंग के नॉनकंपाऊंडेबल हिस्से को तय सीमा में नहीं गिराता तो उसे प्रतिदिन जुर्माना वसूला जाएगा। बता दें कि सूबे में अकाली भाजपा सरकार दौरान इस कानून की शुरुआत हुई थी मगर उसके बाद कांग्रेस की सरकार ने इस पर पाबंदी लगा दी अब पांच साल बाद अब दोबारा निगम ने इस कानून को लागू करने की तैयारी की है।