जालंधर, ENS: जीएसटी विभाग के जालंधर मोबाइल विंग के अधिकारियों ने फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी रिफंड चोरी करने का बड़ा मामला पकड़ा है। इन लोगों ने न तो कुछ खरीदा और न ही कुछ बेचा। दरअसल, इन लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 144 फर्में बनाई थीं। इन सभी फर्मों पर एक ही मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड था, जहां से ये रैकेट पकड़ा गया। ये लोग एक फर्म का बिल दूसरी फर्म के नाम पर काटने का फर्जीवाड़ा कर रहे थे। जिसमें कपड़ा बनाने का जाली कारोबार दिखाया।जिसमें बताया जाता था कि जालंधर से लेकर लुधियाना और आगे दुबई तक एक्सपोर्ट होने वाले कपड़े वह एक दूसरे को सेल कर रहे हैं। इस कारोबार के आधार पर जीएसटी रिफंड अप्लाई किया गया था। इससे पहले विभाग ने जब टैक्स रिकाॅर्ड की वेरिफिकेशन की तो सारा मामला पकड़ा गया है।
जालंधर के मोबाइल विंग ने रेडीमेड कपड़े निर्यात करने वाली फर्म के स्टाक से भरा एक ट्रक पकड़ा था, इसी की जांच के बाद कड़ियां जुड़ती गईं। इस केस में 3.65 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है जो अब तक का पंजाब में सिंगल गाड़ी पर लगाया गया सबसे बड़ा जुर्माना है। जीएसटी विभाग के इंटेलीजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट ने पकड़े ट्रक में रखे स्टाक के बिलों पर दर्ज फर्म के नाम और आज तक दिखाए गए कारोबार के डेटा को कई दिन स्टडी किया था। यह बोगस फर्में एक दूसरे के नाम पर बिल काट रही थीं इसी दौरान पाया गया कि 144 फर्मों के मालिकों का मोबाइल नंबर एक ही था। लेकिन इनके मालिकों के आधार कार्ड सहित इत्यादि एड्रेस अलग-अलग थे।
पता चल गया कि केवल फर्जी तौर पर कागजों में ही रेडीमेड कपड़ों की खरीद-फरोख्त दिखाई जा रही है। अब इस मामले में आगे की जांच होगी जिसमें एक-एक फर्म के दिखाए कारोबार, जीएसटी रिफंड और फर्में किन की गारंटी के आधार पर बनाई गई है, इस बारे में पता लगाया जाएगा। जिसके बाद टैक्स चोरी के बड़े खुलासे होने की संभावना है। जिन लोगों ने फर्जी फर्मों के साथ व्यापार किया है उन सभी के जीएसटी रिफंड की जांच हो सकती है।