US Iran War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच ईरान ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति और तेल बाजार दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। यह कदम केवल व्यापारिक राहत नहीं, बल्कि एक गहरी रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
पांच देशों को ही क्यों मिली छूट?
चीन:
ईरान के लिए चीन सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने ईरानी तेल खरीदना जारी रखा है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक निवेश और ऊर्जा समझौते ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं। ऐसे में चीन के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना ईरान के लिए अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने जैसा है।
रूस:
रूस और ईरान का रिश्ता साझा हितों पर आधारित है। दोनों देश पश्चिमी दबाव और प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। सैन्य और तकनीकी सहयोग ने उनके संबंधों को और मजबूत किया है। होर्मुज में रूसी जहाजों की सुरक्षा इस साझेदारी को और गहरा करती है।
भारत:
भारत, जो एक तरफ अमेरिका के करीब है, वहीं ईरान के साथ भी ऐतिहासिक संबंध बनाए हुए है। चाबहार बंदरगाह परियोजना इस रिश्ते की अहम कड़ी है। ईरान चाहता है कि भारत फिर से उसके तेल बाजार में लौटे। ऐसे में भारतीय जहाजों को प्राथमिकता देना एक सकारात्मक संकेत है।
इराक:
इराक और ईरान के बीच भौगोलिक और धार्मिक संबंध बेहद मजबूत हैं। ऊर्जा आपूर्ति और राजनीतिक सहयोग के चलते दोनों देशों के रिश्ते गहरे हैं। इराकी जहाजों को छूट देना क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।
पाकिस्तान:
पाकिस्तान के साथ ईरान के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के लिए स्थिरता जरूरी है। गैस पाइपलाइन परियोजना और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे दोनों को जोड़ते हैं। पाकिस्तान को शामिल करना ईरान की पड़ोसी नीति का हिस्सा है।
ईरान की रणनीति क्या है?
ईरान का यह कदम कई स्तरों पर काम करता दिखता है:
प्रतिबंधों का तोड़:
इन देशों के साथ व्यापार जारी रखकर ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों के असर को कम करना चाहता है।
वैश्विक संदेश: ईरान
यह दिखाना चाहता है कि वह अलग-थलग नहीं है, बल्कि उसके पास मजबूत सहयोगी हैं।
सुरक्षा संतुलन:
अगर इन देशों के हित होर्मुज से जुड़े रहेंगे, तो किसी भी सैन्य कार्रवाई का जोखिम बढ़ जाएगा।
