नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच में तनाव कम के लिए अब प्रयास तेज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र महासबा में ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में यह कहा गया है कि सात दिनों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जाए और जंग को रोक दिया जाए। इसके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह से रिश्तों को लेकर भी एक लक्ष्मण रेखा खींचने को कह दिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत के बाद अब बार-बार अमेरिकी हमलों के कारण प्रतिबंधों के चलते ईरान को अब अमेरिका पर विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा है कि ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव का विरोध करना जारी रखेगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस समझौते को खारिज कर दिया है। वहीं रॉयटर्स ने यह दावा किया है कि दोनों देशों के अधिकारी एक योजना पर चर्चा कर रहे हैं ताकि जहाजों का आना-जाना शुरु हो पाए और अमेरिका अपनी नाकाबंदी को हटा ले। इस समझौते के बदले अब ईरान को उसके जब्त पैसे वापिस भी मिल पाएंगे।
7 दिनों की दी योजना
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि – ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को सात दिनों की एक ठोस योजना बनाई है। यदि जरुरी शर्तें पूरी होगी तो होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल दिया जाए। इसके अलावा सात दिनों के अंदर जहाजों का आना-जाना बहाल कर दिया जाएगा। ऐसे में अब इसका फैसला अमेरिका करेगा। वहीं ईरान दबाव, धमकी या फिर डराने की कोशिश स्वीकार नहीं करेगा इसके अलावा किसी भी दबाव में आकर अपने अधिकारों को भी नहीं छोड़ेगा।
अराघची ने यह कह दिया है कि यदि अमेरिकी पक्ष वास्तव में समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर गंभीर है तो मैं आपको बता दूंगा कि अब हर चीज तैयार है। ईरान ने इससे पहले यह कहृ दिया था कि यदि अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मानेगा तो वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा से खोल देगा और अपने परमाणु को लेकर बातचीत भी सात दिनों के अंदर फिर से शुरु कर देगा।
ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव के आगे नहीं झुकेगा
एक इंटरव्यू में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि अब के समय में कतर और पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच में दखलअंदाजी कर रहे हैं और वही तेहरान का संदेश वाशिंगटन तक पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि ये वार्ता दोनों देशों के बीच में हस्ताक्षर हुए एक पुराने समझौता ज्ञापन पर आधारित है। ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि अमेरिकियों को इस पर अपना रुख साफ करना चाहिए।
अमेरिका और इजरायल पर ईरान को आत्मनिर्भर बनने से रोकने का आरोप लगाते हुए पेजेशकियन ने कहा है कि तेहरान इन सभी रुकावटों के बाद भी अपने विकास और सशक्तिकरण में निवेश करेगा। ईऱानियों ने अमेरिकी और इजरायली हमलों का सामना किया है और आगे भी करेंगे।