नई दिल्ली: ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग को 31 दिन हो गए हैं, लेकिन जंग अभी तक जारी है। वहीं मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टकराव का असर इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इतना ही नहीं इसका भारत पर सीधा असर होगा। दरअसल, आज के दौर में दुनिया के सभी देश पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर हैं। इंटरनेट की वजह से दुनिया का एक कोना दूसरे कोने से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अगर हमलों में सबमरीन केबल्स को निशाना बनाया जाता है, तो इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा।
दरअसल, आज के समय में करीब 95 फीसदी इंटरनेट इन्हीं केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स समुद्र के अंदर हजारों किलोमीटर तक फैली होती हैं और अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं। अगर युद्ध के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया, तो कई देशों में इंटरनेट या तो बेहद धीमा हो सकता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है। इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऐसी चोट मिलेंगी, जिससे उबरने में लंबा वक्त लग जाएगा। इन इंटरनेट केबल्स का रूट तीन प्रमुख महासागर, प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर से होते हुए गुजरती है। इनमें सबसे अहम रूट लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट का है।
दरअसल, हिंद महासागर में सबमरीन केबल्स के होर्मुज स्ट्रेट के रूट से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 15 से 30 फीसदी तक का इंटरनेट सप्लाई होता है। सीमीवी-6, 2अफ्रीका (मेटा/फेसबुक) और ब्लू रमन (गूगल का प्रोजेक्ट) इसी रूट के जरिए भारत और यूरोप को जोड़ते हैं। 2अफ्रीका (मेटा/फेसबुक) दुनिया का सबसे लंबा सबमरीन केबल सिस्टम (45,000 किमी) है। इस प्रोजेक्ट का खास हिस्सा पूरा हो चुका है। हालांकि, हूतियों के हमले और असुरक्षा के कारण पर्शियन गल्फ और लाल सागर में प्रोजेक्ट का आगे का काम रुका हुआ है। ब्लू रमन प्रोजेक्ट का ज्यादातर हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन लाल सागर के रूट में काम रुका है। सीमवी-6, 21,700 किमी लंबी केबल सिंगापुर से फ्रांस तक बिछाई जा रही है।
भारत में भारती एयरटेल इसके मुख्य पार्टनर्स में से एक है। भारती एयरटेल ने चेन्नई और मुंबई में इस केबल लाइन की लैंडिंग पूरी की है। हिंद महासागर में रिलायंस जियो का प्रोजेक्ट काम कर रहा है। रिलायंस जियो भारत-एशिया-एक्सप्रेस (आईएएक्स) और इंडिया-यूरोप-एक्सप्रेस (आईईएक्स) जैसे प्रोजेक्ट इस रूट में हैं। यह केबल लाइन पूर्व में सिंगापुर और पश्चिम में यूरोप की ओर बिछाई जा रही है।
रिलायंस जियो आईईएक्स को इस तरह से तैयार कर रहा है, ताकि लाल सागर में किसी भी तरह की परेशानी आने पर ट्रैफिक को अन्य रास्तों पर डायवर्ट किया जा सके। इसके अलावा प्रशांत महासागर में मौजूद इंटरनेट लाइन केबल्स अमेरिका और पूर्वी एशिया के लिए अहम हैं। यह रूट अमेरिका को जापान, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे पूर्वी एशियाई देशों से जोड़ता है। जापान और अमेरिका के बीच इस रूट से फॉस्टर नाम की लाइन केबल मौजूद है, जो दोनों देशों को जोड़ता है। पैसिफिक कनेक्ट इनिशिएटिव (गूगल) प्रोजेक्ट के जरिए इस रूट में 1 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है। इसमें प्रोआ और तैहेई जैसे नए केबल्स पर काम चल रहा है।