“महाशिवरात्रि” पर कोटला कलां में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब
शिव शंभू के जयकारों से गूंज उठे शिव मंदिर
ऊना/सुशील पंडित : देशभर में आज महाशिवरात्रि का पावन त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। जिला के कोटला कलां में शिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तों का तांता लगा रहा । मंदिर को फूलों , ओर बेलपत्रों से सजाया गया ।महादेव की एक झलक पाने के लिए रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लगना शुरू हो गया। शिवरात्रि के पावन पर्व पर क्षेत्र के शिवालयों में शनिवार भोर से ही बम-बम भोले के जयकारे गूंजने लगे। जलाभिषेक के लिए सभी प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी- लंबी कतारें लगी हुई थी। मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार देर शाम तक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही फूलों और विद्युत मालाओं से भव्य सजावट की गई। कोटला कलां मंदिर ओम नमः शिवाय ,बम बम भोले ,जय शिव शंभू ,के जयकारों से गूंज उठा।

शिवरात्रि के अवसर पर कोटला कलां के प्राचीन महादेव मंदिर में 81 फ़ीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने लंबी लंबी कतारों में लगकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। जिला के प्रमुख ऐतिहासिक शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का खूब जनसैलाब उमड़ा। जिला में स्थित नौ ऐतिहासिक शिव मंदिरों में गुरु द्रोणाचार्य की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध गगरेट में शिवबाड़ी, बाबा गरीब नाथ मंदिर कोलका, गांव चताड़ा में बनौड़े महादेव व अद्र्धनारीश्वर, तलमेहड़ा स्थित सदाशिव ध्यूंसर महादेव, गांव बडूही में नीलकंठ महादेव, बंगाणा में चौमुखा महादेव, अरलू के सांडा महादेव और भगवान् शिव की 81 फ़ीट ऊँची प्रतिमा वाले महादेव मंदिर कोटला कलां में सुबह भौर फूटने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो गई थी।शिव मंदिरों में फूलों और लाइटों से भव्य सजावट की गई थी।
महाशिवरात्रि, शिव और शक्ति के मिलन का पर्व है। महाशिवरात्रि पर जागरण करना लाभकारी होता है। शिव-शक्ति को प्रसन्न करने के लिए उनके विवाह की झांकी भी निकाली जाती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ ‘शिव की महान रात’ है। इस दिन जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
