नई दिल्ली: वेनेजुएला के मामले को लेकर दुनियाभर में कई देश अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। चीन समेत कई देशों ने अमेरिका के इस एक्शन की कड़ी निंदा भी की है। अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियानों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद से पैदा हुए संकट के बीच में भारत की सबसे बड़ी चिंता इस समय वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा है।
लोगों की भलाई के लिए निकालें समाधान
लक्जमबर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा कि वो एक साथ में बैठकर वेनेजुएला के लोगों के कल्याण के लिए एक समाधान पर आएं। उन्होंने आगे कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि हमने कल एक बयान जारी किया था इसलिए मैं आपसे उसे देखने की अपील करुंगा। हम हाल ही में हुए इन घटनाक्रमों को लेकर काफी चिंतित हैं लेकिन हम सभी संबंधित पक्षों से भी अपील कर रहे हैं कि वो अब बैठकर वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के हित में कोई समाधान निकालें क्योंकि यही हमारी चिंता है।
वेनेजुएला के साथ कैसे हैं भारत के रिश्ते
एस जयशंकर ने कहा है कि हम वेनेजुएला को एक ऐसे देश के रुप में देखना चाहते हैं जिसके साथ हमारे कई सालों से बहुत अच्छे संबंध है। ऐसे में हम चाहते हैं कि घटनाक्रम चाहे जो भी हो वहां के लोग सुरक्षित रहें। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हाल ही में एक ऑपरेशन के दौरान अमेरिका की सेना ने राजधानी कराकस से गिरफ्तार किया है। उन्हें अब अमेरिका में ले जाया गया है। अमेरिका में उन पर ड्रग्स तस्करी और अवैध हथियारों के मामले को लेकर मुकदमा चलाया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने जारी किए एक बयान में कहा है कि – वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम बहुत ही चिंताजनक है। हम स्थिति पर बारीकी के साथ नजर रख रहे हैं। हम सभी संबंधित पक्षों से शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए भी कह रहे हैं। कराकार में स्थित भारतीय दूतावास भारतीय समुदायों के संपर्क में हैं और हर संभव सहायता भी दी जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर पर भी आया बयान
वैश्विक राजनीति पर भी विदेश मंत्री ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश वही करेगा जिससे उन्हें सीधा फायदा होगा। वो आपको मुफ्त सलाह देंगे। यदि कुछ होता है तो वे कहेंगे, कृप्या ऐसा न करें। यदि तनाव होता है तो हमें चिंता होती है कभी-कभी आप लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं जैसे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि आप उनसे पूछे कि सच में उन्हें चिंता है तो वो अपने ही इलाके को क्यों नहीं देखते और खुद से क्यों नहीं पूछते हैं कि वहां हिंसा का स्तर क्या है जितना भी जोखिम उठाया गया है आप जो कर रहे हैं उससे हम बाकी लोगों को कितनी चिंता है परंतु दुनिया का यही स्वभाव है। लोग जो कहते हैं वह करते नहीं हमें इस भावना से स्वीकार करना ही होगा।