नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किस समय क्या करेंगे उनका अगला कदम क्या होने वाला है ये कोई भी नहीं जानता। जब से ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने है वह अपने फैसलों से सभी को चौंका रहे हैं। खासतौर पर टैरिफ को लेकर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति अपने बयान बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने एकतरफा फैसला लेते हुए भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है ऐसे में इसका भारत के द्वारा भी लगातार विरोध जारी है।
वैसे भारत और अमेरिका में कारोबारी रिश्ते काफी अच्छे हैं परंतु मौजूदा समय में भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर अमेरिका ही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 131.84 डॉलर रहा है। इस दौरान भारत ने अमेरिका को 86.51 बिलियन डॉलर का निर्यात भी किया है और 45.33 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात किया।
टैरिफ को लेकर दोनों देशों में दूरियां काफी बढ़ चुकी है क्योंकि ट्रंप कभी पीएम मोदी को अपना दोस्त बताते हैं और अगले दिन ही व्यापारिक प्रतिबंध बढ़ा देते हैं। इससे रणनीतिक भरोसा कमजोर होता है। इसी बीच अब एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपना दोस्त बताया है और सभी कारोबारी मतभेदों को जल्द दूर करने की बात कही है।
भारत को नहीं लेना चाहिए जल्दबाजी में फैसला
अब अचानक भारत को लेकर ट्रंप के रुख में लचीलेपन के कई कारण हो सकते हैं क्योंकि उन्होंने हाल ही में यूरोपीय संघ को भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए भी कहा था जबकि वो भारत से ट्रेड समझौते की बात भी लगातार कह रहे हैं। उनकी बदलती हुई चाल एक तरह से भारत के लिए चुनौती भी है। जानकारों का यह कहना है कि भारत को जल्दबाजी में किसी भी तरह के फैसले लेने से बचना चाहिए।
एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के इस माहौल में किसी MASALA (Mutually Agreed Settlements Achieved Through Leveraged Arm Twisting) डील से बचना चाहिए। ट्रंप ने अब हाल ही में यूरोपीय संघ से यह कहा है कि वे रुस पर दबाव बनाने के लिए भारत और चीन से आने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगाए। वहीं दूसरी ओर वो पीएम मोदी से बात जारी रखने और व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं पर सच्चाई यह है कि अमेरिका पहले ही कई भारतीय निर्यात उत्पादों पर शुल्क दरें दौगुनी कर चुका है इससे निर्यातकों को काफी झटका लगा है।
एक्सपर्ट्स ने यह सुझाव दिया है कि यदि भारत पर लगे प्रतिबंधों को हटाए बिना बात फिर से शुरु हुई तो वह भारत को अतिरिक्त समझौतों के लिए दबाव में ले आएगी। भारत को इससे अपने कुछ जरुरी मुद्दों पर पीछे हटना पड़ेगा। इससे ट्रंप को कथित विजेता साबित करने का भी मौका मिलेगा। भारत को अमेरिका की इस अनिश्चितता को संतुलित करने के लिए बाकी देश जैसे यूरोप, जापान, रुस के साथ अपने रिश्ते मजबूत बनाने पड़ेंगे।
