नई दिल्ली : नीदरलैंड सरकार द्वारा एक युवती को इच्छा मृत्यु देने का मामला सामने आया है। महिला का नाम जोराया टेर बीक है, जो नीदरलैंड में जर्मनी के बॉर्डर के पास रहती हैं। इच्छा मृत्यु के लिए उसने साढ़े तीन साल तक प्रशासन को मनाने की कोशिश की। सूत्रों के मुताबिक उसे इसी महीने इच्छा मृत्यु दी सकती है। हालाांकि जोराया शारीरिक रूप से बिल्कुल फिट है। ऐसे में उनकी इच्छा मृत्यु को मिली मंजूरी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार जोराया ने बताया कि उसकी परेशानियां बचपन में ही शुरू हो गई थीं। उनको क्रॉनिक डिप्रेशन, एंग्जायटी, ट्रॉमा और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी समस्याएं होने लगी।

इसके अलावा उन्हें ऑटिज्म की भी समस्या थी। इसमें वह खुद को ही चोट पहुंचाने लगी। कुछ साल बाद जब जोराया को एक पार्टनर मिला तो उन्हें लगा था कि सब ठीक हो जाएगा। उनकी मानसिक समस्याएं अब दूर हो जाएंगी, मगर कोई हल नहीं निकला। जोराया ने कहा कि 10 सालों तक कई तरीकों से अपना इलाज कराने के बाद आखिरकार निराश होकर उसने स्वस्थ जीवन जीने की उम्मीद छोड़ दी। इसके बाद उसने इच्छा मृत्यु के लिए आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि इच्छा मृत्यु पाना इतना भी आसान नहीं है। यह लंबी प्रोसेस होती है जिसमें आप कई डॉक्टरों से मिलते हैं।

जो तय करते हैं कि आपकी इच्छा मृत्यु की मांग उचित है या नहीं। बता दें कि नीदरलैंड वह पहला देश है जिसने इच्छा मृत्यु को कानूनी अनुमति दी है। साल 2001 में वहां इच्छा मृत्यु को वैधता मिली। नीदरलैंड में आमतौर पर इच्छा मृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद डॉक्टर्स लास्ट टाइम प्रोसीजर संबधित व्यक्ति के घर पर ही करते हैं। इस दौरान पेशेंट को एक खास तरह का इंजेक्शन दिया जाता है और कुछ ही मिनट में उसकी मौत हो जाती है। खास बात यह है कि मौत के बाद भी इस मामले की जांच होती है। अगर डॉक्टर्स की जरा भी लापरवाही सामने आती है तो उन्हें 12 साल की कैद हो सकती है। 2022 के दौरान नीदरलैंड में कुल 8501 लोगों ने इस कानूनी तरीके से प्राण त्यागे थे।
