आणंद: गुजरात के आणंद जिले की नाबालिग से दुष्कर्म के बाद कत्ल करने के मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां अदालत ने 7 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले के दोषी को दोहरी मौत की सजा सुनाई है। खंभात सत्र न्यायालय के न्यायाधीश परवीन कुमार ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की धारा 6 (गंभीर यौन हमला) के तहत अर्जुन गोहेल (29) को दोषी ठहराया। लोक अभियोजक रघुवीर पंड्या ने कहा कि अदालत ने मामले को दुर्लभतम करार दिया और अभियोजन पक्ष की मांग के अनुसार आरोपी को दोहरी मौत की सजा सुनाई। पंड्या ने कहा, अदालत ने पीड़ित के परिवार को 13 लाख रुपये का मुआवजा भी देने को कहा है। अभियोजन के अनुसार आणंद जिले के खंभात ग्रामीण पुलिस स्टेशन क्षेत्र में 28 अक्टूबर, 2019 को 7 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की भयानक घटना सामने आई थी।
जांच में पता चला कि 24 वर्षीय आरोपी दडो उर्फ अर्जुन अंबालाल गोहेल, गुजराती नववर्ष के दौरान बच्ची को बिस्किट का लालच देकर अपने साथ ले गया था। मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को पानी के टेंक में डाल दिया था। जब स्थानीय लोगों को एक गांव के बाहरी इलाके में एक खेत में सात साल की बच्ची का अर्धनग्न शव मिला था। मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई थी कि गला घोंटने से पहले उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ डेढ़ महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं कोर्ट के इस कड़े फैसले को लोगों ने ऐतिहासिक बताया है ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ समाज को एक कड़ा संदेश भी दिया गया। गृह राज्य मंत्री ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।
गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने में अमूल्य योगदान देने वाले सभी पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को बधाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त किया, जिसने त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया के माध्यम से इस गंभीर अपराध में फैसला सुनाया। मंत्री हर्ष संघवी ने कहा है कि यह फैसला गुजरात की न्यायपालिका और पुलिस व्यवस्था की दक्षता के साथ-साथ राज्य सरकार की अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वहीं सरकारी वकील रघुवीर पंड्या ने बताया कि सत्र न्यायालय ने इस मामले को दुर्लभतम करार दिया और दोषी को दुष्कर्म व हत्या के अपराध के लिए अलग-अलग मौत की सजा सुनाई। ।