नई दिल्ली: भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया है, जिससे मुद्रा बाजार में चिंता बढ़ गई है। दरअसल, शेयर बाजार में भारी गिरावट और FII की लगातार बिकवाली के बीच सोमवार के कारोबार के दौरान रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 95 का आंकड़ा पार कर गया। भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों की विदेशी मुद्रा पोजिशन पर सख्ती किए जाने के बावजूद रुपये को केवल मामूली सहारा ही मिल पाया।
जारी आंकड़ों के अनुसार डॉलर के मुकाबले में रुपया दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ 95.157 के लेवल पर कारोबार कर रहा था। जबकि कारोबारी सत्र के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले में 95.58 के लेवल के साथ लाइफ टाइम लोअर लेवल पर कारोबार करता हुआ दिखाई। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले में रुपए में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात अब भी रुपये के खिलाफ बने हुए हैं। इस बीच, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता ने शेयर बाजार पर भी दबाव डाला है। प्रमुख सूचकांक निफ्टी में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई और यह मार्च 2020 के बाद अपनी सबसे खराब मासिक गिरावट की ओर बढ़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, महंगे तेल और विदेशी निवेश की निकासी रुपये और भारतीय बाजार दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं। बताया जा रहा हैकि आरबीआई के दखल के बावजूद, रुपये पर दबाव बना हुआ है।
लगातार विदेशी पोर्टफोलियो के बाहर जाने और भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से इस करेंसी पर बुरा असर पड़ा है, क्योंकि तेल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सट्टेबाजी की गतिविधियों पर रोक लगाने के कदम के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 130 पैसे की बढ़त के साथ खुला। RBI ने करेंसी को स्थिर करने के लिए डॉलर पर ऑनशोर लॉन्ग पोजीशन को सीमित कर दिया था। कारण था कि हाल के हफ्तों में करेंसी लगातार नए निचले स्तरों पर पहुंच गई थी।