चित्रकूट में श्री राम जी ने राजा भरत को चरण पादुकाएं लेकर भेजा अयोध्या
ऊना/सुशील पंडित: उपमंडल बंगाणा के श्री राम नाटक क्लब हटली में चल रहे 67वें शुद्ध रामायण मंचन के दौरान शनिवार की रात दर्शकों ने भावनाओं से ओतप्रोत अद्भुत दृश्य देखे। रामायण के प्रसंगों के मंचन में सबसे पहले श्रीराम और केवट संवाद का मंचन हुआ। इस प्रसंग ने पंडाल को भक्तिभाव से भर दिया। कथा के अनुसार जब भगवान श्रीराम, सीता माता और लक्ष्मण जी वनवास के लिए अयोध्या से प्रस्थान कर गंगा तट पहुंचे तो गंगा पार कराने के लिए केवट ने अपनी नाव प्रस्तुत की।
लेकिन उसने स्पष्ट कहा कि वह तब तक प्रभु को नाव में बैठाकर गंगा पार नहीं कराएगा, जब तक उनके चरण धोकर स्वयं अपने पात्र में नहीं रख लेता। मंच पर यह दृश्य जब जीवंत हुआ तो उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। कलाकारों ने अपने संवाद और अभिनय से वातावरण को इतना वास्तविक बना दिया कि दर्शक भी केवट की भक्ति में डूब गए। पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और जय श्री राम के जयघोष से पूरा माहौल गूंज उठा। इसके बाद मंचन में भरत मिलाप का दृश्य प्रस्तुत हुआ। मंचन के अनुसार जब भरत को पता चला कि माता कैकेयी के वचनों के कारण श्रीराम को वनवास जाना पड़ा है और उन्हें अयोध्या का राज्य मिला है तो वे व्यथित हो गए।
उन्होंने तुरंत निश्चय किया कि वे किसी भी हाल में राजगद्दी स्वीकार नहीं करेंगे और प्रभु श्रीराम को वापस अयोध्या लाने जाएंगे। मंचन के दौरान भरत और श्रीराम का मिलन दर्शाया गया। भरत की करुणा और राम की मर्यादा ने उपस्थित जनसमूह को गहराई तक प्रभावित किया। मंचन के अंत में जब श्रीराम ने भरत को समझाते हुए अपनी चरण पादुकाएं अयोध्या की गद्दी पर स्थापित करने के लिए दीं तो पूरा पंडाल श्रद्धा और भावुकता से भर गया। कलाकारों ने इस दृश्य को इतनी कुशलता से प्रस्तुत किया कि लोगों को लगा मानो वे सचमुच त्रेतायुग का दृश्य देख रहे हों।
श्रीराम नाटक क्लब हटली ने इस अवसर पर एक विशेष आयोजन भी किया। रामायण से संबंधित 16 प्रश्नों की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता मंच पर करवाई गई। प्रतियोगिता में स्थानीय युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्न सरल से लेकर कठिन तक थे, जिनमें प्रतिभागियों को रामायण के प्रमुख प्रसंगों, पात्रों और मर्यादाओं से जुड़े सवालों के जवाब देने पड़े। इस प्रतियोगिता ने माहौल को और रोचक बना दिया। प्रतियोगिता के विजेताओं को क्लब की ओर से बंपर इनाम दिए गए। छोटे बच्चों को रामायण की पुस्तकें और धार्मिक सामग्री भेंट की गई जबकि युवाओं को स्मृति चिह्न और ट्रॉफियां प्रदान की गईं।
केवट प्रसंग और भरत मिलाप जैसे मार्मिक प्रसंगों ने दर्शकों के हृदय को छू लिया और उन्हें त्रेतायुग की उस पावन गाथा का साक्षात् अनुभव कराया। श्री राम की भूमिका में अवनीश सोनी लक्ष्मण की भूमिका में दिनेश खत्री सीता की भूमिका में तरुण कौशल केवट की भूमिका में विवेक शील शर्मा भरत की भूमिका में अंकुश सोनी शत्रुघ्न की भूमिका में शुभम् शर्मा मंत्री की भूमिका में अमन शर्मा वरिष्ठ की भूमिका में सुरेन्द्र राणा कौशल्या की भूमिका में राज कुमार धीमान सुमित्रा की भूमिका में अजय धीमान के अलावा राहुल शर्मा समर धीमान ओम राणा ओम प्रकाश सोनी पूर्ण सिंह राणा आदि सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से पंडाल को भावुक भोर किया।