पंचकूलाः वार्डबंदी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का कांग्रेस विधायक चंद्र मोहन ने स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया है। वहीं, पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है और इससे आम जनता को न्याय मिला है। चंद्र मोहन ने इस मुद्दे पर उनके साथ संघर्ष करने वाले सभी पार्षदों का आभार व्यक्त किया। इस पूरी लड़ाई में पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिनके सहयोग और लगातार प्रयासों के चलते यह मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः सच्चाई सामने आई।
नगर निगम चुनाव को लेकर पंचकूला प्रशासन ने जल्दबाजी में प्रदेश में सबसे पहले वार्डबंदी तैयार कर दी थी। कांग्रेस नेताओं ने प्रारंभिक स्तर पर ही इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज करवाई थी, लेकिन प्रशासन ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए वार्डबंदी का अंतिम प्रकाशन कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग हरियाणा को भी शिकायत भेजी, लेकिन वहां भी उनकी बात नहीं सुनी गई।
विधायक ने आगे कहा कि वार्डबंदी के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) वार्डों की संख्या में कमी को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके साथ ही वार्ड आरक्षण के लिए किए गए ड्रा की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। बावजूद इसके प्रशासन ने सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अपनी प्रक्रिया को सही ठहराया।
चंद्र मोहन ने आरोप लगाया कि वार्डबंदी और आरक्षण प्रक्रिया में नगर निगम पंचकूला, शहरी स्थानीय निकाय विभाग तथा पंचकूला के उपायुक्त (डीसी) शामिल थे। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इन सभी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।