लातेहारः झारखंड के लातेहार में मातम में लोगों की खुशियां बदल गई। दरअसल, महुआडांड़ थाना क्षेत्र के ओरसा घाटी में यात्रियों से भरी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में लोगों में चीख पुकार मच गई। घटना में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन की मदद से घायलों को बस से बाहर निकाला गया। पहले उन्हें इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ और आशा कामलेल अस्पताल भेजा गया।
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— EncounterIndia (@encounterindia) January 19, 2026
प्राथमिक उपचार के बाद 52 से अधिक घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची, लातेहार और गुमला रेफर किया गया। वहीं घटना में कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल 4 लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों में पिपरशकोट गांव निवासी रेशांती देवी (35), प्रेमा देवी (37), सीता देवी (45), सोहामती देवी (45), सुखवा भुइयां (40) और विजय बसंत (32) शामिल हैं। ये सभी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस सस्ता ओरसा घाटी से गुजर रही थी, तभी अचानक उसके ब्रेक फेल हो गए। तेज ढलान पर बस चालक नियंत्रण नहीं रख सका और बस सड़क किनारे पलट गई। बस में सवार यात्री एक-दूसरे पर गिर पड़े। कई लोग बस के नीचे दब गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। मामले की जानकारी देते हुए घायल परिजन लक्ष्मी देवी ने बताया कि शादी में शामिल होने के लिए सभी लोग खुशी-खुशी निकले थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर जानलेवा साबित होगा। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है, वहीं गंभीर रूप से घायल अन्य यात्रियों को भी महुआडांड़ से गुमला लाया जा रहा है।
पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। दरअसल, घटना की सूचना मिलते ही एसडीओ विपिन कुमार दुबे और एसडीपीओ शिवपूजन उरांव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को जब्त कर लिया है और चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत स्कूल बसों का इस्तेमाल केवल छात्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए किया जा सकता है। इसके बावजूद इस बस का इस्तेमाल निजी कार्यक्रम में लोगों को ले जाने के लिए किया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का भी अपमान है।
