ऊना/सुशील पंडित:संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज जी के पावन जन्म महोत्सव पर देश भर में शोभायात्राएं निकाली जा रही हैं। कुटलैहड़ में भी दर्जनों जगहों पर गुरू रविदास के अनुयायियों ने भव्य समागमों का आयोजन किया। विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टों ने कई कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद भुट्टो ने कहा कि संत श्री गुरु रविदास जी द्वारा 15 वीं शताब्दी में चलाया गया भक्ति आंदोलन उस समय की एक बड़ी क्रांति थी। काशी में जन्मे रैदास महाराज के शिष्यों में वहां के राजाओं से लेकर पंडित पुजारी भी सम्मलित थे।
संत कबीर महाराज जी भी उनके गुरु भाई थे और महान संत मीरा बाई उनकी शिष्या थीं। रविदास महराज के बारे में संतों का यह भी कहना है कि भारत के अध्यात्मिक गगन में वे सदैव ध्रुव तारे की तरह हमारा मार्ग दर्शन करते रहेंगे। उस काल में संत रविदास जी और संत कबीर जी परम पूज्य गुरू रामानंद जी के शिष्य थे। ऐसा दुर्लभ संयोग शायद पहले कभी नहीं बना कि जब मीरा बाई सत्य की खोज में भटक रही थीं तब उन्होंने सहज साधारण जीवन व्यतीत करने वाले रविदास जी महाराज को अपना गुरू माना।
रविदास जी ही थे जिनके श्री चरणों में बैठकर मीरा बाई की भक्ति खिल गई और एक राजकुमारी ने श्री कृष्ण को कलयुग में प्राप्त कर लिया। चमड़े का काम करने वाले रविदास जी महाराज ने जब यह बात कही थी कि मन चंगा तो कठौती में गंगा तभी अध्यात्म के क्षेत्र में क्रांति घटित हो गई थी। उन्होंने समाज की ऊंचनीच को समाप्त करने के लिए राजाओं से लेकर आम साधारण जन के मन में प्रेम के बीज रोपित किए। उन्होंने अपने जीवन में कई गीत, दोहे और भजनों की रचना की जो मानव जाति को आत्म निर्भरता, सहिष्णुता और एकता का संदेश देने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें समाज से जातिवाद, भेदभाव और सामाजिक असमानता के भाव को हटाकर भाईचारे और सहिष्णुता का भाव अपनाने के संदेश दिया था। आज उनकी वाणी दसों दिशाओं में गूंज रही है। इस मौके पर कुटलैहड़ कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राम आसरा शर्मा, महासचिव प्रवीण शर्मा, अजय शर्मा, पूर्व प्रधान सुदर्शन शर्मा, राकेश कुमार, ठाकुर किशोरी के अलावा अन्य लोग मौजूद रहे।
