चंडीगढ़ः गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस कस्टडी से हुए इंटरव्यू मामले में नया मोड़ सामने आया है। इस मामले में मोहाली अदालत ने पुलिस कर्मियों के पॉलीग्राफ टेस्ट के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। छ पुलिसकर्मियों के वकील ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर कर कहा कि उनके मुवक्किलों ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति वापस ले ली है।
जानकारी के मुताबिक पहले 6 पुलिसकर्मी मुख्तियार सिंह, कांस्टेबल सिमरनजीत सिंह, कांस्टेबल हरप्रीत सिंह, कांस्टेबल बलविंदर सिंह, कांस्टेबल सतनाम सिंह और कांस्टेबल अमृतपाल सिंह ने पहले पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति जताई थी। इसमें एक पुलिसकर्मी ने टेस्ट करवाने से मना किया था। बाद में उक्त पुलिसकर्मियों के वकील सुल्तान सिंह संघा ने बताया कि एडीजीपी रैंक का एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आदेश पारित होने के समय अदालत में ही मौजूद था और उनके मुवक्किलों ने दबाव में पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति दी थी। संघा ने कहा कि संबंधित अदालत के समक्ष अपनी सहमति दर्ज करने के समय पुलिसकर्मियों के साथ कोई वकील नहीं था। आपको बता दें इन सभी को 3 अप्रैल 2022 को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू करने का दोषी पाया गया था। लॉरेंस तब सीआईए पुलिस स्टेशन खरड़ में बंद था। तभ इन्हें सस्पेंड किया गया था।
सूत्रों मुताबिक, जांच एजेंसियों को संदेह है कि जेल के अंदर हुआ इंटरव्यू सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। ऐसे में यह पॉलीग्राफ टेस्ट यह पता लगाने के लिए कराया जाएगा कि जेल स्टाफ या पुलिस मुलाजिमों में से किसी ने लॉरेंस बिश्नोई को मीडिया तक पहुंचाने में कोई मदद तो नहीं की।
