Loading...
- Advertisement -
Html code here! Replace this with any non empty raw html code and that's it.
HomeGovernment Newsजी-राम-जी एक्ट से भ्रष्टाचार-मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी : नायब सिंह सैनी

जी-राम-जी एक्ट से भ्रष्टाचार-मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी : नायब सिंह सैनी

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 भ्रष्टाचार मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी प्रदान करता है। यह ग्रामीण रोजगार नीति अधिक गारंटी वाले कार्यदिवस, उच्च मजदूरी, पारदर्शी भुगतान और टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण को सुनिश्चित करता है। इस नए कानून से पहले की मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार और खामियों को दूर किया गया है।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों के कल्याण और गांवों के विकास में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विकसित भारत-जी राम जी योजना शुरू की है। यह विषय देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश परिवारों से जुड़ा हुआ है।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, रणबीर गंगवा, कृष्ण कुमार बेदी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वीबी जी-राम जी कानून का उद्देश्य उन वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों का समर्थन करना है, जिन्हें पिछली सरकारों ने धोखा दिया था। यह अधिनियम परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था करता है, मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। श्रमिकों को गारंटीकृत रोजगार बढ़ाकर अधिक मजदूरी देती है। ये श्रमिक अब भ्रष्ट ठेकेदारों, अधिकारियों या राजनेताओं की तिजोरियाँ भरने के लिए नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

खामियों से भरे ढांचे में बदलते समय के साथ पुरानी प्रणालियों को परिवर्तित करना आवश्यक

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना लगभग 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी। मनरेगा और ऐसी ही अन्य कई योजनाओं की प्रकृति ही ऐसी होती है कि इन्हें तैयार किया जाता है, पारित किया जाता है, लागू किया जाता है और इनमें सुधार भी किया जाता है। मनरेगा के अंतर्गत कई समस्याएं सामने आईं, जैसे कि श्रमिकों के बजाय मशीनों का उपयोग करना, बजट का अत्यधिक अनुमान, पहले से पूर्ण की गई परियोजनाओं को दोबारा करना, और ऐसी ही कई कमियां देखने को मिलीं, लेकिन आज सच्चाई यह है कि देश, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछले 20 वर्षों में मूल रूप से बदल चुके हैं। ग्रामीण गरीबी वर्ष 2011-12 में जहां 25 प्रतिशत से अधिक थी, वहीं आज यह घटकर लगभग 5 प्रतिशत से भी नीचे आ चुकी है। इसका अर्थ है कि वर्तमान केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण 25 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाओं, डी.बी.टी., आधार और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। ऐसे में एक पुराने, खामियों से भरे ढांचे को बिना सुधार के ढोते रहना न तो श्रमिकों के हित में था और न ही राष्ट्र के।

नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा

नायब सिंह सैनी ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को काफी बढ़ावा मिला है। इसके माध्यम से, सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। इससे पूरे भारत वर्ष में एक ग्रामीण अकुशल श्रमिक की वार्षिक आय में औसतन 7 हजार रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी। हरियाणा में मजदूरी दर ज्यादा है, इसलिए हर श्रमिक को कम से कम 10 हजार रुपये अधिक मिलेंगे।

केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना से न केवल काम के अधिक दिन सुनिश्चित होंगे, जिससे बेहतर वेतन मिलेगा, बल्कि अनिवार्य साप्ताहिक वेतन भुगतान (अधिकतम 15 दिनों तक की देरी की अनुमति के साथ) से श्रमिकों को समय पर बढ़ा हुआ वेतन प्राप्त होगा। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा। इसे संभव बनाने के लिए, केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 88 हजार करोड़ थी, जो उस समय तक का सबसे अधिक आवंटन था यानी पिछले रिकॉर्ड आवंटन को भी पार कर लिया गया है। इसमें अकेले केंद्र सरकार का हिस्सा 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा, जिसे सरकार आने वाले वर्षों में बढ़ाने का वादा करती है।

हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के श्रमिकों को तथा 65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत इस वर्ष हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के श्रमिकों को तथा 65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला है। यह काम वास्तव में उन्हें मिला है। पहले तो मशीनों से काम करवा लिया जाता था और उन्हें वास्तव में काम मिलता ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि इस कानून में कार्यों की प्रकृति को भी बदला गया है। पहले मनरेगा के तहत सीमित रोजगार दिया जाता था। अब जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संसाधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाली स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में भी रोजगार दिया जाएगा। ग्राम पंचायतों की योजनाओं को पी.एम. गति शक्ति मास्टर प्लान से जोड़ा गया है, ताकि गांवों में होने वाला हर काम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो।

इस योजना में अब कृषि के चरम मौसम के दौरान 60 दिनों का विराम शामिल किया गया है ताकि देश के किसान और मजदूर मिलकर काम कर सकें और मजदूरों को कृषि मौसम के दौरान उनके श्रम के लिए बाजार की उच्च दरें मिल सकें।

भ्रष्टाचार से निपटने और शोषण को रोकने के लिए किए गए तकनीकी उपाय

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने, शोषण को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल वास्तविक श्रमिकों को ही पारदर्शिता के साथ उनका हक मिले, वीबी जी- राम जी योजना में कई उपाय किए गए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और उपस्थिति से फर्जी कर्मचारियों, डुप्लिकेट जॉब कार्ड और फर्जी भुगतानों को रोका जा सकेगा। वेतन और भत्तों का सीधा, डिजिटल भुगतान इससे बिचौलियों, वेतन भुगतान में देरी और धन के दुरुपयोग की समस्या समाप्त हो जाएगी। जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी इस योजना के तहत बनाई गई प्रत्येक संपत्ति को जियो-टैग किया जाएगा और इसरो के भुवन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि भ्रष्ट ठेकेदारों या अधिकारियों द्वारा फर्जी परियोजनाओं का पंजीकरण न हो सके। साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासे इससे श्रमिकों की सूची, भुगतान, प्रतिबंध और निरीक्षण सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं। शिकायत रजिस्टर और ब्लॉक एवं जिला स्तर पर बहुस्तरीय शिकायत निवारण के साथ 7-दिवसीय निपटान समय सीमा अंतहीन विवादों और मुकदमों के बजाय अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है, साथ ही पूर्वाग्रह और दमन को समाप्त करता है।

उन्होंने कहा कि धन की हेराफेरी के लिए धोखे से बनाई गई फर्जी परियोजनाओं को रोकने के लिए, नए प्रावधानों को चार क्षेत्रों में बांटा जाएगा। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संसाधन और जलवायु संरक्षण। अब, यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बनने के बजाय विकास में एक वास्तविक और ठोस योगदानकर्ता के रूप में काम करेगी।

 

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -

You cannot copy content of this page