फार्मा कंपनी सील, लाखों की ड्रग मनी जब्त, 6 गिरफ्तार
अमृतसरः पंजाब पुलिस ने ड्रग माफिया के खिलाफ एक बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करकते हुए गैरकानूनी फार्मा ऑपओेड सप्लाई चेन का पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर ने इस कार्रवाई में एक फार्मास्यूटिकल कंपनी के प्लांट प्रमुख समेत 6 लोगों को गिरफ़्तार किया है। इस नेटवर्क से 70,000 से अधिक प्रतिबंधित ट्रामाडोल गोलियां और लाखों रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। इस पूरे ऑपरेशन की कहानी एक फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी है। पुलिस के अनुसार, यह जांच एक छोटी रिकवरी से शुरू हुई थी, यानी सिर्फ 35 ट्रामाडोल गोलियों से शुरू हुई थी।

जब इस मामले की कड़ियों को जोड़ा गया तो जांच एजेंसियां अमृतसर से हरिद्वार, उत्तराखंड तक फैले एक संगठित नेटवर्क तक पहुंच गईं। जांच में पाया गया कि इस पूरी खेल के पीछे फार्मा कंपनी लूसेंट बायोटेक लिमिटेड का हाथ है। इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने खुद सार्वजनिक की है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह कार्रवाई एक मामूली सी बरामदगी 35 टैबलेट्स मिलने से शुरू हुई थी। जांच के दौरान अब तक कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें स्थानीय केमिस्ट, वितरक और ल्यूसेंट बायोटैक लिमिटेड नामक दवा कंपनी का प्लांट हेड शामिल है।
सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में 70,000 से ज़्यादा ट्रामाडोल टैबलेट 7.65 लाख रुपए की ड्रग मनी, 325 किलो ट्रामाडोल कच्चा माल बरामद किया गया। सरकारी आपूर्ति वाली दवाएं काली मार्केट में सबसे गंभीर बात यह है कि जब्त की गई ट्रामाडोल की स्ट्रिप्स पर लिखा हुआ था- “केवल सरकारी आपूर्ति हेतु- बिक्री के लिए नहीं”। जिससे यह स्पष्ट है कि मेडिकल स्टॉक को अवैध रूप से डायवर्ट किया जा रहा था। इससे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में सामने आए कई फार्मा यूनिट्स ने ड्रग मैन्युफैक्चरिंग नियमों का खुला उल्लंघन किया था, जिन्हें फिलहाल सील कर दिया गया है। साथ ही उनके रिकॉर्ड को जब्त कर फोरेंसिक और कानूनी जांच की जा रही है। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि नशे के नेटवर्क को पंजाब की धरती पर किसी भी कीमत पर फलने-फूलने नहीं दिया जाएगा। चाहे वह पारंपरिक ड्रग्स हों या फार्मास्युटिकल ओपिओइड्स, पंजाब पुलिस हर एंगल से कार्रवाई कर रही है।