बकाए को लेकर प्राइवेट अस्पतालों का सरकार को अल्टीमेटम
ऊना/सुशील पंडित: प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश (पीएचएएचपी) ने एक फरवरी से हिमकेयर कार्ड स्वीकार न करने की चेतावनी दी है। निजी अस्पतालों की संस्था का कहना है कि सरकार ने उन्हें पिछले इलाज का भुगतान नहीं किया है। प्राइवेट अस्पतालों में अब तक हिमकेएर स्कीम के तहत कार्ड धारकों को निशुल्क इलाज की सेवा मिल रही थी। इलाज का खर्च सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस योजना के तहत उठाया जा रहा था। अब कई महीनों से सरकार द्वारा निजी अस्पतालों को भुगतान न करने के कारण यह गतिरोध उत्पन हुआ है। इससे उन मरीजों को नुकसान होगा जो प्रदेश के निजी अस्पतालों में निशुल्क आधुनिक सेहत सेवाओं का लाभ उठा रहे थे। सरकारी अस्पतालों का स्तर पहले से गिरा हुआ है। लोग प्राइवेट में जाकर महंगा इलाज करवाने को विवश थे। हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से प्रदेश के लाखों परिवारों को फ्री इलाज की सुविधा उपलब्ध हो गई थी। अब प्राइवेट अस्पतालों ने फ्री इलाज तो कर दिया लेकिन सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को उसका भुगतान नहीं किया। प्राइवेट अस्पतालों की संस्था का आरोप है कि इससे निजी अस्पताल कंगाली की कगार पर पहुंच गए हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अस्पतालों की आर्थिक हालत अब बिगड़ चुकी है। हम बार बार सरकार को इस दिन के लिए चेताते रहे लेकिन प्रदेश सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी। अब हारकर हमें सत्यग्रह का मार्ग पकड़ना पड़ रहा है। एक फरवरी से हम हिमकेयर कार्ड को स्वीकार नहीं करेंगे। यह स्कीम जनता को राहत दे रही थी। जब तक सरकार हमारे पिछले बिलों के भुगतान नहीं कर देती, हम हिमकेयर के अंतर्गत मिलने वाली कैशलैस सेहत सेवाएं बंद रखेंगे।
संस्था के सदस्यों का कहना है कि “अब स्थिति यह है कि राज्य में लगभग हर व्यक्ति के पास यह स्वास्थ्य कार्ड है और वह कैशलेस सुविधा का लाभ उठा रहा है। समस्या इस हेल्थ कार्ड को जारी करने से नहीं है, समस्या यह है कि इससे सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। निजी अस्पताल प्रबंधन को भी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें मरीजों को दवा और अन्य स्वास्थ्य उपकरण खुले बाजार से नकद में खरीदने पड़ते हैं।”एसोसिएशन ने कहा कि दवा और स्वास्थ्य उपकरण आपूर्तिकर्ता (मेडिसिन एंड इक्विपमेंट सप्लायर) आपूर्ति बरकरार रखने में अनिच्छुक हो रहे हैं क्योंकि उन पर भी निजी अस्पतालों की आपूर्ति के भारी लंबित बिलों का बोझ है और इस स्थिति के कारण सभी पर गंभीर मानसिक और वित्तीय तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि लगभग 100 से अधिक निजी अस्पताल हैं जो सरकार की योजना का सम्मान कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा को अनसुना कर रही है, जिसके कारण अधिकांश निजी अस्पताल कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।एसोसिएशन ने यह भी कहा कि उन्हें भारी मन से निर्णय लिया है कि निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जो लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, वे सरकार से आग्रह करेंगे कि उनकी बकाया राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ दिया जाए अन्यथा एसोसिएशन के सदस्य मजबूर होकर स्वास्थ्य कार्ड्स लेना बंद कर देंगे क्योंकि इनमें कोई नकदी रकम मिलने की गारंटी नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर राज्य भर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों का बकाया नहीं चुकाया गया तो फरवरी के पहले सप्ताह में सांकेतिक बंद रहेगा और मांग न माने जाने पर इसे अनिश्चितकालीन तक हिमकेयर कार्ड का बहिष्कार किया जायेगा।
“हालाँकि, हम आयुष्मान भारत कार्ड लाभार्थियों की सेवा जारी रखेंगे क्योंकि हमारा मानना है कि इस स्कीम के अधीन केवल वास्तविक योग्य वंचित आबादी को ही यह विशेषाधिकार प्राप्त है। स्वास्थ्य सरकारी अधिकारियों से अनुरोध है कि वे हमारी दुर्दशा को समझें और राज्य स्वास्थ्य कार्डों का सम्मान न करने के लिए किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य न हों । हिमाचल प्रदेश के लोगों से भी अनुरोध है कि वे हालत की नजाकत को समझें और सहयोग करें,”
