असंधः हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने असंध सीट से इस्तीफे का ऐलान किया है। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला लिया। बता दें कि कल हुए हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव में उन्होंने 1900 वोटों से जीत हासिल की थी।

दरअसल, हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के करीब 11 साल बाद हुए चुनाव में सिख नेता सरदार जगदीश सिंह झींडा गुट का दबदबा रहा। सिख नेता संत बलजीत सिंह दादूवाल इस चुनाव में हार गये, जबकि सरदार दीदार सिंह नलवी बहुत कम वोटों से चुनाव जीत पाए हैं। वहीं दूसरी ओर सिख नेता बलदेव सिंह कायमपुरी ने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनके गुट के कुछ सदस्यों ने ही हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव में जीत दर्ज कराई है।
हरियाणा सिख एकता दल ने राज्य के 40 वार्डों में हुए चुनाव में सात उम्मीदवारों को अपना समर्थन दिया था, जिसमें से पांच की जीत हुई है। बलजीत सिंह दादूवाल, दीदार सिंह नलवी और जगदीश सिंह झींडा अलग-अलग समय पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के चुनाव में रविवार को सुबह आठ बजे मतदान आरंभ हुआ, जो कि पांच बजे तक चला।
राज्य के सभी 22 जिलों को 40 वार्डों में बांटा गया था। 40 सदस्यों के चुनाव के बाद इनमें से अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव समेत विभिन्न पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा। अब से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के तहत हरियाणा से सदस्य चुने जाते थे। यह पहला मौका है, जब हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का स्वतंत्र चुनाव हुआ है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव में 70.73 प्रतिशत मतदान हुआ है।
सबसे ज्यादा 78.56 प्रतिशत मतदान डबवाली में हुआ, जबकि रतिया में 76.11 प्रतिशत वोट पड़े। रतनगढ़ में 74.2 प्रतिशत, कांगठली में 73.68, रानियां में 75.03 और नाथूसरी चौपटा में 76.73 प्रतिशत सिख मतदाताओं ने मतदान किया है। एचएसजीएमसी केचुनाव को लेकर राज्य के सिख मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं के साथ नवोदित युवा मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया।
एचएसजीएमसी के चुनाव में चार प्रमुख सिख नेताओं बलजीत सिंह दादूवाल, जगदीश सिंह झींडा, बलदेव सिंह कायमपुर और दीदार सिंह नलवी गुटों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। बलजीत सिंह दादूवाल की टीम ने शिरोमणि अकाली दल (हरियाणा) आजाद के बैनर तले चुनाव लड़ा, जबकि जगदीश सिंह झींडा की टीम ने पंथक दल (झींडा) के बैनर तले अपनी पसंद के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा।