एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई थी न्यूज़, डीएफओ ऊना सुशील राणा बोले, तथ्यों के बिना खबरें न चलाएं, राजस्व विभाग की निशानदेही के बाद ही होगी अंतिम पुष्टि
ऊना/सुशील पंडित: जिला ऊना वन विभाग द्वारा जारी एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति में हाल ही में एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित 1000 पेड़ों के कथित अवैध कटान की खबर को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौके पर की गई गहन जांच में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान की कोई पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग जिला ऊना की टीम ने खबर प्रकाशित होते ही तुरंत संबंधित स्थल का निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान केवल 18 पेड़ कटे हुए पाए गए। इनमें से कुछ पेड़ सूखे थे, जबकि कुछ पेड़ निजी भूमि पर स्थित थे। विभाग ने कहा कि इन 18 पेड़ों में से कितने पेड़ सरकारी भूमि पर थे, इसकी स्पष्ट पुष्टि राजस्व विभाग की निशानदेही के बाद ही संभव हो पाएगी,वन विभाग ने बताया कि सरकारी और निजी भूमि के बीच स्पष्ट सीमांकन के लिए राजस्व विभाग को औपचारिक रूप से पत्र भेजा जाएगा। निशान देही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि वास्तव में कितने पेड़ों का कटान सरकारी भूमि पर हुआ है और उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस पूरे प्रकरण में एक स्थानीय निवासी सन्नी शर्मा का नाम भी सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि कुछ पेड़ उनकी निजी मिल्कियत भूमि पर थे, जिन्हें अवैध रूप से काटा गया है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस में चोरी की शिकायत भी दर्ज करवाई है। राजस्व विभाग के पटवारी द्वारा भी पुष्टि की गई है कि संबंधित खसरा नंबर 2717 (00-33-05) सन्नी शर्मा की निजी भूमि है। वन विभाग ऊना ने 1000 पेड़ों के अवैध कटान के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की अपुष्ट खबरें न केवल जनता में भ्रम फैलाती हैं, बल्कि सरकारी विभागों की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। विभाग ने मीडिया से जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करने और किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खबर प्रकाशित करने वाले संवाददाता को वन विभाग द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था। संवाददाता ने बताया कि उन्हें यह जानकारी स्थानीय निवासी संजय कुमार से फोन के माध्यम से प्राप्त हुई थी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों, जिनमें वन खंड अधिकारी ऊना, वन रक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल थे, ने संजय कुमार से संपर्क कर उस स्थान की सटीक जानकारी मांगी, जहां कथित रूप से 1000 पेड़ों का कटान हुआ था। हालांकि संजय कुमार मौके की सटीक पहचान कराने में असमर्थ रहे। उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वह पहले ही स्थान दिखा चुके हैं और अब विभाग अपने स्तर पर जांच करे। इस स्थिति के चलते वन विभाग को स्वतंत्र रूप से पूरे क्षेत्र की विस्तृत जांच करनी पड़ी।
वन विभाग ऊना रेंज ने अपने स्टाफ की जिम्मेदारी भी तय की है और स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने दोहराया कि अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह सजग है और किसी भी प्रकार के अवैध कटान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान विभाग ने तत्परता दिखाते हुए मौके से 74 खैर के मोछे (लकड़ी के टुकड़े) भी बरामद किए हैं। इस मामले में पुलिस थाना ऊना में 18 मार्च 2026 को औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएफओ ऊना सुशील राणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वन विभाग हर सूचना को गंभीरता से लेता है और मौके पर जाकर तथ्यों की जांच करता है। इस मामले में 1000 पेड़ों के कटान की खबर पूरी तरह निराधार पाई गई है। जांच में केवल 18 पेड़ कटे हुए मिले हैं, जिनमें भी कई निजी भूमि पर हैं। राजस्व विभाग की निशानदेही के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
डीएफओ सुशील राणा ने यह भी आश्वस्त किया कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वन संपदा की सुरक्षा विभाग सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएफओ ऊना सुशील राणा ने फिर दोहराया कि दैनिक अखबार में प्रकाशित 1000 पेड़ों की कटाई की खबर पूरी तरह भ्रामक है और विभाग इसका कड़ा खंडन करता है। फिलहाल सभी की नजरें राजस्व विभाग की निशानदेही और पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं, जिससे इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
