ऊना/ सुशील पंडित : राजकीय महाविद्यालय ऊना के 6 एचपी (आई) कंपनी एनसीसी ऊना के कैडेट्स और आपदा प्रबंधन क्लब ने जिला ऊना के अग्निशमन विभाग के सहयोग से एक विशेष अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया। यह मॉक ड्रिल उन लोगों की स्मृति में आयोजित की गई, जिन्होंने विभिन्न आपदाओं में अपने प्राण गंवाए हैं। इस आयोजन का उद्देश्य “अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस” के अवसर पर आपदा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कैडेट्स को प्रशिक्षित करना था।
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय ऊना के कार्यवाहक प्रिंसिपल पुनीत प्रेम ने एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए आपदा सुरक्षा और इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता और तैयारी का भाव जागृत करते हैं, जिससे वे किसी भी संकट की स्थिति में प्रभावी और त्वरित कदम उठा सकें।
यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए), शिमला द्वारा शुरू किए गए “समर्थ 2024” जन जागरूकता और क्षमता निर्माण अभियान के तहत आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक करना और उन्हें किसी भी प्रकार की आपदा के लिए मानसिक और भौतिक रूप से तैयार करना है।
अग्निशमन विभाग ऊना के कमांडेंट मेजर विकास सकलानी ने इस मॉक ड्रिल में भाग लिया और कैडेट्स को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से आपदाओं से पहले की गई तैयारी और उचित जानकारी से जानमाल का नुकसान कम किया जा सकता है।
इसके बाद, फायर ऑफिसर सुरेश कुमार ने अग्नि सुरक्षा पर एक व्यापक व्याख्यान दिया। उन्होंने आग लगने की स्थिति में किए जाने वाले त्वरित कदमों की जानकारी दी और आग बुझाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। कैडेट्स को हाथों-हाथ अग्निशमन यंत्रों का उपयोग सिखाया गया, ताकि वे वास्तविक जीवन में ऐसी आपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें।
इस कार्यक्रम का आयोजन कैप्टन अश्विनी कुमार और प्रोफेसर करन कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने पूरे आयोजन को सुचारू रूप से संचालित किया और सुनिश्चित किया कि सभी प्रतिभागियों को सही दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण प्राप्त हो। यह मॉक ड्रिल कार्यक्रम न केवल कैडेट्स के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण का अवसर था, बल्कि यह समाज में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का एक कदम भी था।
