भक्त प्रहलाद ओर भक्त ध्रुव इसके उदाहरण हैं
ऊना/ सुशील पंडित : कोटला कलां स्थित संत बाबा बाल जी आश्रम में चल रहे वार्षिक महोत्सव के अंतर्गत भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक आचार्य गौरव कृष्ण शास्त्री जी ने भगवान के विभिन्न अवतारों का सुंदर वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, विश्वास और धैर्य का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने विशेष रूप से भक्त प्रह्लाद और भक्त ध्रुव के प्रसंग सुनाकर बताया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जो भक्त भगवान का नाम नहीं छोड़ते, उनके सभी कष्ट भगवान स्वयं हर लेते हैं।
आचार्य गौरव कृष्ण ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। उनके पिता हिरण्यकशिपु ने उन्हें कई प्रकार की यातनाएं दीं, लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा के कारण भगवान नरसिंह अवतार में प्रकट होकर उनकी रक्षा के लिए आए। उन्होंने कहा कि सच्चे भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं और अंततः सत्य की ही विजय होती है।
इसके साथ ही उन्होंने भक्त ध्रुव की प्रेरणादायक कथा का भी वर्णन किया। ध्रुव राजा उत्तानपाद और रानी सुनीति के पुत्र थे। सौतेली माता सुरुचि द्वारा अपमानित किए जाने के बाद बालक ध्रुव ने अपनी माता के कहने पर भगवान विष्णु की भक्ति का मार्ग अपनाया। आचार्य जी ने बताया कि वन में नारद मुनि ने उन्हें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की दीक्षा दी, जिसके बाद मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव ने कठोर तपस्या कर भगवान को प्रसन्न कर लिया।
भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर ध्रुव को दर्शन दिए और उन्हें आकाश में अटल स्थान देते हुए ध्रुव तारा बनने का वरदान प्रदान किया। आचार्य जी ने कहा कि ध्रुव की दृढ़ भक्ति हमें सिखाती है कि श्रद्धा और संकल्प से असंभव भी संभव हो जाता है।
कथा के दौरान आश्रम परिसर भक्ति रस से सराबोर रहा। श्रद्धालु भजन-कीर्तन और प्रवचनों में भाव-विभोर नजर आए। अंत में आचार्य गौरव कृष्ण शास्त्री जी ने सभी को भगवान के नाम स्मरण, सत्संग और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा आश्रम जयकारों व भक्ति के माहौल से गूंजता रहा।
