चंडीगढ़: पंजाब की सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज घोषणा की कि बैकवर्ड क्लास (बी.सी.) प्रमाणपत्रों संबंधी फैले भ्रम को दूर करने और हर योग्य व्यक्ति को उसका बनता हक सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर विशेष जागरूकता और सुविधा मुहिम शुरू की जाएगी। यहां पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार के ध्यान में यह बात आई है कि कई स्थानों पर नियमों की गलत व्याख्या के कारण योग्य आवेदकों को बी.सी. प्रमाणपत्र जारी करवाने में दिक्कतें आ रही हैं।
डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि बी.सी. प्रमाणपत्र के लिए पात्रता का निर्धारण केवल आवेदक के माता-पिता की स्थिति के आधार पर किया जाता है। जीवनसाथी की नौकरी, आय या सामाजिक स्थिति का इससे कोई संबंध नहीं है। इसी प्रकार चाचा, ताया या किसी अन्य रिश्तेदार की स्थिति को भी पात्रता तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने बताया कि संवैधानिक पदों पर तैनात व्यक्तियों, निर्धारित श्रेणियों के क्लास-एक और क्लास-दो अधिकारियों, कुछ पेशेवरों तथा निर्धारित संपत्ति या क्रीमी लेयर की शर्तों में आने वाले परिवारों के बच्चे बी.सी. श्रेणी के लाभों के हकदार नहीं होते।
यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता या परिवार में पहले कभी बी.सी. प्रमाणपत्र नहीं बना, तो इस आधार पर नया आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता। डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि नियमों का एकसमान पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ बैठकें की जाएंगी। मंत्री ने बताया कि बैकफिंको के माध्यम से बी.सी. वर्ग से संबंधित योग्य लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए रियायती ऋण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में लड़कों और लड़कियों के लिए 100-100 सीटों वाले दो छात्रावास स्थापित किए जा रहे हैं।