नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क पर सख्ती बढ़ा दिया है। अब इसी बीच उन्होंने एक बड़ा बयान दे दिया है। ट्रंप के इस बयान के बाद ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच में बढ़ रहा तनाव और भी ज्यादा बढ़ता दिख रहा है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि – ‘NATO पिछले 20 सालों से डेनमार्क को यह बता रहा है कि आपको रुसी खतरे को ग्रीनलैंड से दूर करना होगा। दुर्भाग्यवश डेनमार्क इसके लिए कुछ नहीं कर पाया। अब समय आ गया है और यह किया जाएगा’।
“NATO has been telling Denmark, for 20 years, that “you have to get the Russian threat away from Greenland.” Unfortunately, Denmark has been unable to do anything about it. Now it is time, and it will be done!!!” – President Donald J. Trump pic.twitter.com/ZyFh9OsNsn
— The White House (@WhiteHouse) January 19, 2026
ग्रीनलैंड चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप काफी समय से ग्रीनलैंड पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड को खरीदने तक मंशा जाहिर की थी। इसके लिए अब ट्रंप अपने ही नाटो सहयोगियों पर आर्थिक दबाव भी डाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ कह दिया है कि यदि डेनमार्क और उसके साथ देश ग्रीनलैंड की खरीद-बिक्री पर बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए तो उन्हें इसकी आर्थिक कीमत चुकानी होगी। ट्रंप ने 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि 1 जून तक समझौता नहीं हुआ तो यह टैक्स बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।
इस वजह से खास है ग्रीनलैंड
बता दें कि ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यहां आबादी कम है परंतु इसकी रणनीतिक और राजनीतिक अहमियत भी काफी है। यह आर्कटिक क्षेत्र में भी स्थित है ऐसे में सैन्य, एनर्जी और व्यापार के लिहाज से इलाका बहुत ही संवेदनशील माना जाता है। बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं। खनिज संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है। यही कारण है कि अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।