नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब एक खतरनाक मोड़ पर है। दुनिया के सबसे जरुरी तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को लेकर ईरान के रुख अचानक बदलते दिख रहे हैं। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे में यह समुद्री रास्ता नहीं खुला है। अमेरिका ईरान के बिजली घरों को निशाना बनाएगा। इस धमकी के कुछ ही घंटों के बाद ईरान ने एक बड़ा बयान दिया है। इसमें थोड़ी नरमी और कुछ शर्तें साफ झलक रही है।
न्यूज एजेंसी के अनुसार, रॉयटर्स के अनुसार, ईरान का कहना है कि वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं रखना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसावी ने रविवार को कहा कि दुश्मन देशों के जहाजों को छोड़कर बाकी सबके लिए यह रास्ता खुला है। यहां दुश्मन ने उनका सीधा मतलब अमेरिका और इजरायल से है।
ईरान ने कहा कि यदि कोई जहाज उनके सुरक्षा नियमों का पालन करता है। उसका ताल्लुक उनके दुश्मनों से नहीं तो उसे गुजरने में कोई दिक्कत नहीं होगी। धमकी का असर या कूटनीति गौर करने वाली बात यह है कि सारा बवाल बीते 28 फरवरी से शुरु हुआ था। उस समय ईरान ने इस रास्ते को बंद करने का ऐलान करते हुए कहा था कि वह अमेरिका और इजरायल के हमले है। उनका कहना है कि वो तेहरान खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा और नाविकों को हिफाजत के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करने को तैयार है लेकिन इसके लिए आपसी भरोसा जरुरी है।
दूसरी ओर अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए नौसैनिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी हालांकि नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य एक्शन से हाथ खींच लिए थे। अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के इस शर्तों वाले ऑफ को स्वीकार करता है या 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बाद कड़ा एक्शन लेता है फिलहाल नजरें इसी बात पर कि यह विवाद बातचीत से सुलझता है या बात जंग तक पहुंचती है। समझते हैं कि आप सोमवार के दिन ऑफिस में काम कर रहे हैं।
ईरान का तर्क है कि खाड़ी में हालात बिगड़ने की असली जड़ अमेरिका और इजरायल के हमले हैं। उनका कहना है कि वे तेहरान खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत के लिए संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं लेकिन इसके लिए आपसी भरोसा जरुरी है। दूसरे तरफ अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक नौसेनिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान का कहना है कि वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं रखना चाहता। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसावी ने रविवार को कहा कि दुश्मन देशों के जहाजों को छोड़कर बाकी सबके लिए यह रास्ता खुला है। यहां दुश्मन से उनका सीधा मतलब अमेरिका और इजरायल से है। ईरान ने कहा यदि कोई जहाज उनके सुरक्षा नियमों का पालन करता है और ताल्लुक उनके दुश्मनों से नहीं है तो उसे गुजरने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
ईरान का तर्क है कि खाड़ी में हालात बिगड़ने की असली जड़ अमेरिका और इजरायल के हमले हैं। उनका कहना है कि वो तेहरान खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर करने का तैयार है लेकिन इसके लिए आपसी भरोसा जरुरी है। दूसरी ओर अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक नौसैनिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी हालांकि नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य एक्शन से हाथ खींच लिए थे। अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के इस शर्तों वाले ऑफर को स्वीकार करता है या 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बाद कोई बड़ा एक्शन लेता है। फिलहाल सबकी नजरें इसी बात पर कि यह विवाद बातचीत से सुलझता है या बात जंग तक पहुंचती है।
