अमृतसरः शहर के एक मंदिर में गणेश जी की मूर्ति स्थापना को लेकर 2 पक्षों में विवाद हो गया। एक पक्ष मूर्ति स्थापित करने पर अड़ा रहा, जबकि दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया। विरोधी पक्ष का कहना था कि अगर मंदिर में कोई नई मूर्ति स्थापित की जाती है, तो उसका फैसला मंदिर समिति ही लेगी, किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं। बताया जा रहा है कि एक पक्ष मंदिर का अध्यक्ष रह चुका है और वह मूर्ति स्थापित करने पर अड़ा रहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
दूसरी ओर, दुर्गियाना समिति ने कहा कि इस मूर्ति को स्थापित करने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है और अगर कोई जानबूझकर मूर्ति स्थापित करना चाहता है, तो यह गलत कदम होगा। समिति ने स्पष्ट किया कि मंदिर से जुड़े हर फैसले पर अंतिम निर्णय मंदिर समिति का ही होगा।
बोरवेल शिवाला मंदिर के सेवादार संजीव शर्मा ने बताया कि मंदिर में मूर्ति का चक्र 2019 से टूटा हुआ है। इसी के चलते मंदिर कमेटी ने दुर्गियाना समिति को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या ये मूर्ति खंडित है, अगर है तो इसे बदला जाएगा। दुर्गियाना समिति ने कमेटी भेज इसका जायजा लिया और कहा कि यह मूर्ति पूजने योग्य है जिसके चलते इसे इसी तरह पूजा जाने लगा। पवन प्याला जो मंदिर का पहला अध्यक्ष था उसने अब मूर्ति बदलने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर मूर्ति बदलनी ही थी, तो उसने अपने समय में प्रधान रहते हुए क्यों नहीं बदली। उन्होंने कहा कि मूर्ति अगर लगेगी तो संगत के पैसों से लगेगी, किसी एक के पैसे से हम मूर्ति नहीं लगाने देंगे। वहीं दूसरी और दूसरे पक्ष के मंदिर के पूर्व प्रधान मूर्ति लगाने को कह रहे है, उन्होंने कहा कि मूर्ति खंडित हो गई है और उसे बदलना उनका कर्तव्य है।