चंडीगढ़: हरियाणा योग आयोग के सहयोग से गवर्नमेंट रिहैबिलिटेशन इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटीज (GRIID), चंडीगढ़ में “योग द्वारा सशक्तिकरण: बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के जीवन को सुदृढ़ बनाना” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज भव्य शुभारंभ हुआ।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में देशभर से विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया और बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर डॉ. रवनीत कौर (निदेशक, GMCH एवं GRIID) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि डॉ. सुषमा नैन (उप निदेशक, आयुष विभाग, हरियाणा सरकार) विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इसके अलावा, हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य, डॉ. अजीत सिदाना, डॉ. एम. करुप्पासामी, अनिल कुमार, डॉ. रीना जैन, डॉ. राज कुमार, प्रो. डॉ. सी. वी. जयन्ती और डॉ. पवन कुमार गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अजीत सिदाना के स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों और बौद्धिक दिव्यांगता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने योग, पुनर्वास और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया।
हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने कहा कि योग केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन को भी मजबूत करता है। उन्होंने विशेष रूप से बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए योग को एक प्रभावी सहायक माध्यम बताते हुए कहा कि इससे उनके आत्मविश्वास, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। डॉ. मुक्ता कुमार ने बताया कि बौद्धिक एवं विकासात्मक समस्याओं की पहचान जीवन के शुरुआती तीन वर्षों में ही संभव है और समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
वहीं, डॉ. रविंदर कौर और डॉ. ज्योति भोलेश्वर मिश्रा ने योग के माध्यम से व्यवहार प्रबंधन, भावनात्मक स्थिरता और एकाग्रता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। प्रो. डॉ. सी. वी. जयन्ती ने सुझाव दिया कि योगासन को स्पेशल ओलंपिक्स जैसे मंचों पर खेल के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे विशेष बच्चों की भागीदारी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के दौरान GRIID के बच्चों द्वारा योगासन प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने समावेश और आत्मविश्वास का संदेश दिया। इसके साथ ही विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श और शोध प्रस्तुतियों का भी आयोजन हुआ।
सम्मेलन में प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप, योग एवं पुनर्वास के समन्वय, वैज्ञानिक योग मॉड्यूल के विकास, समावेशी शिक्षा और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया।
