जालंधर, 2 नवंबर, 2024: डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने जालंधर जिले में डीएपी खाद की आपूर्ति के बारे में जानकारी दी, जिससे किसानों को फसल बुआई में कोई कठिनाई न हो। उन्होंने बताया कि फिलहाल 1015 टन डीएपी खाद जिले में उपलब्ध है, जिसमें 500 टन सहकारी समितियों और 515 टन निजी विक्रेताओं को दिया गया है।
डॉ. अग्रवाल ने किसानों को डीएपी के साथ-साथ अन्य विकल्पों जैसे ट्रिपल सुपर फॉस्फेट, एनपीके, और सिंगल सुपर फॉस्फेट खाद का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। इन विकल्पों का उपयोग फसल उत्पादन को बढ़ावा देता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाता है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक खादें न केवल सस्ती हैं बल्कि यह मिट्टी को स्थायित्व भी प्रदान करती हैं।
वैकल्पिक खादों के फायदे
अधिकारी ने किसानों को डीएपी के स्थान पर वैकल्पिक खादों की विशेषताओं के बारे में भी अवगत कराया। ट्रिपल सुपर फॉस्फेट, एनपीके, और सिंगल सुपर फॉस्फेट जैसे विकल्प न केवल पोषण तत्वों को संतुलित करते हैं बल्कि मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनाए रखते हैं, जिससे फसलों की बेहतर वृद्धि होती है।
कालाबाजारी पर सख्त निगरानी
डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, प्रशासन ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त निगरानी रखी है। किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर समय खाद की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है ताकि कोई भी किसान जरूरत के समय किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करे।
कृषि अधिकारी डॉ. सुरजीत सिंह ने बताया कि इन वैकल्पिक खादों का उपयोग किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी हो सकता है। उन्होंने बताया कि एनपीके 12:32:16, सिंगल सुपर फॉस्फेट, और एनपीके 20:20:13 जैसे मिश्रण फसलों के पोषक तत्वों को पुनःस्थापित करने में मदद करते हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उपज के लिए लाभकारी हैं।
