ऊना/सुशील पंडित: भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की समृद्धि 2025–26 प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, टक्का की शिक्षिका डेज़ी शर्मा ने अपनी नवाचारी शिक्षण प्रस्तुति से राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान अर्जित की है।
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में डेज़ी शर्मा द्वारा प्रस्तुत परियोजना “जीवविज्ञान में पैटर्न” विषय पर आधारित रही, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों के साथ मिलकर कला और विज्ञान का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया। इस नवाचारी प्रयास से सामान्यतः कठिन और कम रुचिकर माने जाने वाले विषयों को सरल, रोचक और विद्यार्थियों के लिए सहज बनाया गया। उनकी प्रस्तुति को शिक्षाविदों द्वारा विशेष रूप से सराहा गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई कलात्मक कृतियों को मंच से विशेष उल्लेख प्राप्त हुआ, जो इस शिक्षण प्रयोग की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाता है।
इस अवसर पर डेज़ी शर्मा ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, देहलां (ऊना) का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने वंदना शर्मा, वंदना रस्तोगी तथा रेखा के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद प्रकट किया, जिनके निरंतर समर्थन से उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का अवसर प्राप्त हुआ।
डेज़ी शर्मा ने कहा कि देशभर से आए शिक्षकों की प्रस्तुतियों से उन्हें अनेक नवीन विचार और अनुभव प्राप्त हुए हैं, जो भविष्य में उनके शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। यह उपलब्धि न केवल उनके शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण सफलता है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी अधिक सृजनात्मक, प्रेरक और आनंददायक शिक्षण वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
समृद्धि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे कला उत्सव के विस्तार के रूप में आरंभ किया गया है। वर्ष 2015 से कला उत्सव माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता आ रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए समृद्धि कार्यक्रम को विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किया गया है, जो कक्षा शिक्षण में कला-समन्वित शिक्षण पद्धति के माध्यम से अध्ययन को अधिक सृजनात्मक, आनंदमय और प्रभावी बनाते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यह पहल शिक्षा को केवल विषय-वस्तु तक सीमित न रखते हुए रचनात्मकता, जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन को विकसित करने पर बल देती है। समृद्धि का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों को पहचान प्रदान करना, कला और शैक्षणिक विषयों के मध्य सेतु स्थापित करना तथा कक्षाओं को अनुभवात्मक एवं समग्र अधिगम केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
