नई दिल्लीः श्रीलंका को 1996 का वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान अर्जुन रणतुंगा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। श्रीलंका के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (CIABOC) ने सोमवार को अदालत को बताया कि पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मंत्री अर्जुन रणतुंगा को जल्द गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाएगा। वह 2015 से 2019 के बीच यूएनपी सरकार में मंत्री भी रह चुके है। मिली जानकारी के अनुसार अर्जुन रणतुंगा को पेट्रोलियम मंत्री रहने के दौरान हुए भ्रष्टाचार के आरोपों में CIABOC उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बना रही हैं।

भ्रष्टाचार निगरानी संस्था ने कहा कि रणतुंगा और उनके भाई पर लंबे समय के तेल खरीद कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीके को बदलने और ज़्यादा कीमत पर मौके पर खरीदारी करने का आरोप है। रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाले कमीशन के अनुसार, “जिससे राज्य को कुल 800 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ है,” जो 2017 में जब ये डील हुई थीं, उस समय $5 मिलियन से थोड़ा ज़्यादा था। कमीशन ने कोलंबो मजिस्ट्रेट असंगा बोदारागामा को बताया कि अर्जुन विदेश में थे और लौटने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं डेली मिरर, श्रीलंका की रिपोर्ट के अनुसार यह नुकसान उस समय हुआ जब दीर्घकालिक टेंडरों को रद्द कर महंगे दामों पर स्पॉट टेंडर लागू किए गए। सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के लिए 2017-18 के दौरान ईंधन खरीद से जुड़े 3 लॉन्ग-टर्म टेंडर रद्द कर दिए गए थे। इसके बाद उच्च कीमतों पर स्पॉट टेंडर अपनाए गए। आरोप है कि इससे सरकारी कंपनी को करीब 800 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की ओर से सहायक निदेशक (कानूनी) अनुषा समंथाप्पेरुमा अदालत में पेश हुईं। उन्होंने बताया कि CPC के पूर्व चेयरमैन धम्मिका रणतुंगा को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
धम्मिका रणतुंगा को पहला आरोपी, जबकि तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन रणतुंगा को दूसरा आरोपी नामित किया गया है आयोग ने बताया कि अर्जुन रणतुंगा फिलहाल विदेश में हैं, इसलिए उन्हें सोमवार को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। आयोग ने अदालत से हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए संदिग्ध को रिमांड पर लेने का आदेश मांगा क्योंकि घटना की जांच अभी भी जारी है। राष्ट्रपति के वकील सलिया पियरिस ने अदालत में कहा कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। मुख्य मजिस्ट्रेट ने आरोपी (धम्मिका) को 10 लाख की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया। इसी के साथ ही विदेश यात्रा पर प्रतिबंध भी लगा दिया।